नई दिल्ली, 07 अप्रैल (अशोक “अश्क”) देश की प्रमुख विमानन कंपनी एअर इंडिया में बड़ा प्रशासनिक झटका लगा है। कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी कैम्पबेल विल्सन ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है, जिससे विमानन क्षेत्र में हलचल तेज हो गई है। हालांकि, वह अपने उत्तराधिकारी की नियुक्ति तक इस पद पर बने रहेंगे।समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार, यह फैसला ऐसे समय में आया है जब एयरलाइन कई मोर्चों पर भारी दबाव झेल रही है।

वित्त वर्ष 2026 में कंपनी को करीब 20,000 करोड़ रुपये के भारी नुकसान का अनुमान है, जो प्रबंधन के लिए बड़ी चुनौती बन चुका है। पिछले सप्ताह हुई बोर्ड बैठक में विल्सन का इस्तीफा स्वीकार कर लिया गया, लेकिन कंपनी की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। सूत्रों के मुताबिक, कंपनी ने इस साल की शुरुआत में ही नए CEO की तलाश शुरू कर दी थी, जब विल्सन ने संकेत दिया था कि वह अपना कॉन्ट्रैक्ट आगे नहीं बढ़ाना चाहते। उन्होंने सितंबर 2022 में एअर इंडिया की कमान संभाली थी, जब एयरलाइन का निजीकरण होने के बाद यह दोबारा टाटा समूह के पास आई थी।

इस समय एअर इंडिया को कई परिचालन चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के चलते कई देशों ने अपने एयरस्पेस बंद कर दिए हैं, जिससे उड़ानों के रूट बदलने और अतिरिक्त स्टॉप लेने पड़ रहे हैं। इससे ईंधन खपत और लागत दोनों में तेज वृद्धि हुई है। इसके अलावा, नए विमानों की डिलीवरी में देरी से कंपनी की विस्तार योजनाएं प्रभावित हुई हैं। हाल ही में एअर इंडिया ने एयरबस और बोइंग को 470 विमानों का बड़ा ऑर्डर दिया है, लेकिन सप्लाई में देरी से परिचालन पर असर पड़ रहा है। वहीं, अहमदाबाद में हुए दर्दनाक विमान हादसे की छाया अभी भी कंपनी पर बनी हुई है। बोइंग ड्रीमलाइनर AI-171 दुर्घटना में 241 लोगों की मौत ने एअर इंडिया की छवि को गहरा नुकसान पहुंचाया था। विशेषज्ञों का मानना है कि नए CEO के सामने कंपनी को वित्तीय और परिचालन संकट से उबारना सबसे बड़ी चुनौती होगी।

















