नई दिल्ली, 06 अप्रैल (सेंट्रल डेस्क) पश्चिम एशिया में जारी तनाव अब खतरनाक मोड़ लेता दिख रहा है। एक ओर अमेरिका की ओर से लगातार सैन्य कार्रवाई की चेतावनियां दी जा रही हैं, वहीं ईरान ने खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी संपत्तियों को निशाना बनाकर हालात को और गंभीर बना दिया है। इस बीच, ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक अमेरिका और इस्राइल अपने हमले नहीं रोकते, वह किसी भी सीधी वार्ता में शामिल नहीं होगा।

सोमवार को ईरानी विदेश मंत्रालय ने बड़ा बयान जारी करते हुए कहा कि मध्यस्थों के जरिए मिले प्रस्तावों पर उसने अपना जवाब तैयार कर लिया है। हालांकि, मंत्रालय ने अमेरिका के 15 सूत्रीय प्रस्ताव को “अत्यधिक मांगों वाला” बताते हुए खारिज कर दिया। ईरान ने कहा कि उसने अपनी शर्तों का अलग मसौदा तैयार कर लिया है, जिसे औपचारिक रूप दिया जा चुका है। ईरान ने इस्फहान में हुए पायलट बचाव अभियान पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। विदेश मंत्रालय का कहना है कि यह ऑपरेशन महज एक छलावा हो सकता है, जिसका असली मकसद ईरान के संवर्धित यूरेनियम भंडार पर कब्जा करना था।

ईरान ने चेतावनी दी कि किसी भी संभावित युद्धविराम से विरोधी पक्ष को दोबारा संगठित होने का मौका मिल सकता है, जिससे संघर्ष और लंबा खिंच सकता है। इस बीच, ओमान के साथ चल रही बातचीत को लेकर भी अहम जानकारी सामने आई है। ईरान ने कहा कि वार्ता का मुख्य फोकस होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक ठोस प्रोटोकॉल तैयार करना है। यह जलमार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर जल्द ही कूटनीतिक समाधान नहीं निकला, तो यह तनाव बड़े सैन्य संघर्ष का रूप ले सकता है, जिसका असर पूरी दुनिया पर पड़ना तय है।

















