पटना, 03 अप्रैल (पटना डेस्क) ओडिशा के चंदका डंपदा वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी क्षेत्र में रहने वाली शकुंतला चतर 35 ने दो साल पहले पानी की भारी किल्लत से परेशान होकर ऐसा कदम उठाया जिसने पूरे गांव की तस्वीर बदल दी। मिड डे मील रसोइया के रूप में काम करने वाली शकुंतला को रोज कम से कम एक घंटे तक जंगल में पैदल चलकर पानी लाना पड़ता था, जहां जंगली जानवरों खासतौर पर हाथियों का खतरा बना रहता था।

इतना ही नहीं वहां का पानी पीने लायक भी नहीं था। हार न मानते हुए उन्होंने अपनी जमीन पर कुआं खोदने का फैसला किया। लगातार 60 दिनों तक वह रोज तीन से चार घंटे तक खुदाई करती रहीं और आखिरकार 40 फीट गहराई पर पानी निकल आया। इस काम में उनके पति लादुराम चतर और पड़ोसी जगन्नाथ तिगुआ ने भी कभी कभार मदद की।आज यह कुआं न सिर्फ उनके परिवार बल्कि आसपास के चार से पांच घरों की प्यास बुझा रहा है।

गांव की आश्रिता के मुताबिक कुएं का पानी जंगल के झरनों से ज्यादा साफ है। सरपंच विष्णु प्रसाद डेंगा ने कहा कि शकुंतला की मेहनत ने उन्हें नई पहचान दिलाई। साथ ही उन्होंने निकली मिट्टी से चार हजार ईंटें बनाकर अपना टूटा घर भी ठीक कर लिया। ग्रामीण अब उन्हें जल समस्या का असली समाधान मानते हैं और उनकी इस पहल की हर तरफ सराहना हो रही

















