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1000 टन चावल बुर्किना फासो भेज भारत ने बढ़ाया मदद का हाथ, अफ्रीका में गोल्ड कूटनीति

नई दिल्ली, 02 अप्रैल (अशोक “अश्क”) वैश्विक मंच पर मानवीय शक्ति के रूप में उभरते भारत ने एक बार फिर बड़ा कदम उठाते हुए अफ्रीकी देश बुर्किना फासो को 1000 मीट्रिक टन चावल भेजा है। इस राहत को भूख, विस्थापन और आर्थिक संकट से जूझ रहे लाखों लोगों के लिए जीवनदायी सहायता माना जा रहा है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने जानकारी देते हुए बताया कि यह मदद विशेष रूप से कमजोर वर्गों और विस्थापित आबादी की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए भेजी गई है।

उन्होंने कहा कि यह कदम वैश्विक दक्षिण के देशों के साथ भारत की मजबूत साझेदारी और मानवीय प्रतिबद्धता को दर्शाता है। दरअसल, बुर्किना फासो पिछले कुछ वर्षों से राजनीतिक अस्थिरता, आतंरिक संघर्ष और प्राकृतिक आपदाओं का सामना कर रहा है। इन परिस्थितियों ने देश की अर्थव्यवस्था को गहरे संकट में डाल दिया है। इसके बावजूद यह देश खनिज संपदा, खासकर सोने के उत्पादन में तेजी से उभर रहा है, जो इसे वैश्विक स्तर पर महत्वपूर्ण बनाता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, वर्ष 2025 में बुर्किना फासो ने 94 टन सोने का रिकॉर्ड उत्पादन किया, जो 2024 की तुलना में 30 टन अधिक है। सरकार ने इस उपलब्धि का श्रेय खनन क्षेत्र में सुधार और खदानों के राष्ट्रीयकरण को दिया है।

यही कारण है कि भारत और बुर्किना फासो के बीच व्यापारिक रिश्ते भी लगातार मजबूत हो रहे हैं।आंकड़ों के अनुसार, जनवरी में भारत ने बुर्किना फासो से 38.6 मिलियन डॉलर का सोना आयात किया। इसके अलावा काजू और धातु उत्पाद भी भारत आए, जबकि भारत से दवाएं, वाहन और औद्योगिक मशीनरी वहां निर्यात की गईं। यह द्विपक्षीय व्यापार दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को नई ऊंचाई दे रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि बिरिमियन ग्रीनस्टोन बेल्ट जैसे क्षेत्रों में मौजूद विशाल सोने के भंडार भविष्य में उत्पादन को और बढ़ा सकते हैं। गाओआ और हौंडे जैसे इलाके इस दिशा में खास महत्व रखते हैं और यहां खनन की अपार संभावनाएं हैं। वैश्विक परिदृश्य में देखें तो सोने के भंडार के मामले में अमेरिका शीर्ष पर है, जबकि जर्मनी और इटली उसके बाद आते हैं। भारत भी करीब 878 टन सोने के साथ प्रमुख देशों में शामिल है।भारत की यह मानवीय पहल न केवल संकटग्रस्त देश को राहत पहुंचा रही है, बल्कि अफ्रीका में उसकी रणनीतिक और कूटनीतिक पकड़ को भी मजबूत कर रही है, जिससे भविष्य में सहयोग के नए रास्ते खुलने तय माने जा रहे हैं।

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