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75% अग्निवीर होंगे बाहर, सेना में कमी पर सरकार की बड़ी रणनीति

नई दिल्ली, 02 अप्रैल (अशोक “अश्क”) भारतीय सेना में अधिकारियों और जवानों की लगातार बनी हुई कमी को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल अनिल चौहान ने संसद की रक्षा मामलों की स्टैंडिंग कमिटी के सामने साफ किया है कि अग्निपथ योजना के तहत भर्ती किए गए अग्निवीरों में से 75 प्रतिशत इस साल के अंत तक सेवा से बाहर हो जाएंगे, जबकि केवल 25 प्रतिशत को ही स्थायी तौर पर सेना में रखा जाएगा।

सीडीएस ने कमिटी को बताया कि सेना में इस समय अग्निवीरों और अधिकारियों दोनों की कमी है, लेकिन अगले दो से तीन वर्षों में इस कमी को पूरा करने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि सरकार ने 2022 से 2025 के बीच अग्निपथ योजना के तहत कुल भर्तियों की संख्या 1.75 लाख तक सीमित रखी थी, जिसके चलते कुछ समय के लिए कमी बनी हुई है।सबसे पहले नौसेना के अग्निवीरों का पहला बैच इस साल नवंबर में चार साल की सेवा पूरी करेगा। करीब 2600 अग्निवीरों में से केवल 25 प्रतिशत को ही स्थायी नियुक्ति मिलेगी, जबकि बाकी 75 प्रतिशत को सेवा से बाहर कर दिया जाएगा।

इसके बाद अगले साल की शुरुआत में थल सेना और वायुसेना के अग्निवीरों का पहला बैच भी इसी प्रक्रिया से गुजरेगा।सीडीएस ने यह भी स्पष्ट किया कि अग्निवीरों के चयन और स्थायी नियुक्ति के लिए तीनों सेनाओं ने स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर तैयार कर लिए हैं, जिन्हें डिपार्टमेंट ऑफ मिलिट्री अफेयर्स से मंजूरी मिल चुकी है और अब उन्हें लागू किया जा रहा है। कमिटी की ओर से यह सवाल भी उठाया गया कि मौजूदा सुरक्षा परिस्थितियों को देखते हुए सेना में अधिकारियों की कमी को तुरंत भरना कितना जरूरी है। इसके जवाब में रक्षा मंत्रालय ने बताया कि वर्ष 2025 में अधिकारियों की भर्ती में लगभग 28 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई है। साथ ही सर्विस सिलेक्शन बोर्ड की प्रक्रिया में भी सुधार किए गए हैं, जिससे कम उम्र के उम्मीदवारों को अधिक अवसर मिल सके। मंत्रालय के अनुसार, 2024-25 में जारी भर्ती प्रक्रिया के तहत लगभग 90 प्रतिशत पद भरे जा चुके हैं। हालांकि, पहले यह सुझाव दिया गया था कि 25 प्रतिशत से अधिक अग्निवीरों को स्थायी किया जा सकता है, लेकिन मौजूदा संकेतों से साफ है कि फिलहाल सरकार इस प्रतिशत को बढ़ाने के मूड में नहीं है। इस बीच, यह भी स्पष्ट कर दिया गया है कि अग्निवीरों के चार साल के कार्यकाल को बढ़ाने की कोई योजना नहीं है, जिससे आने वाले समय में बड़ी संख्या में प्रशिक्षित युवा सेना से बाहर होंगे।

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