नई दिल्ली, 01 अप्रैल (अशोक “अश्क”) भारतीय वायुसेना के तेजस Mk1A पर बड़ा फैसला, अप्रैल से शुरू होंगे निर्णायक ट्रायल्सनई दिल्ली: स्वदेशी लड़ाकू विमान तेजस Mk1A को लेकर भारतीय वायुसेना ने बड़ा संकेत दिया है। हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड ने 2025-26 के अंत तक 18 विमान तैयार कर टार्मैक पर खड़े कर दिए हैं, लेकिन अब इनकी किस्मत अप्रैल में होने वाले कड़े ट्रायल्स पर टिकी है।

सूत्रों के मुताबिक, वायुसेना पहले पांच विमानों की गहन जांच करेगी और मिसाइल फायरिंग, रडार तथा इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम के पूर्ण इंटीग्रेशन को परखेगी। एयर-टू-एयर और एयर-टू-ग्राउंड क्षमताओं की पुष्टि को अनिवार्य बताया गया है। वायुसेना ने साफ कर दिया है कि तीन अहम मोर्चों पर कोई समझौता नहीं होगा। इनमें मिसाइल क्षमता, रडार-EW तालमेल और हथियार वितरण प्रणाली शामिल हैं। अधिकारियों का कहना है कि यही तेजस Mk1A की असली ताकत है। जानकारी के अनुसार, मिसाइल परीक्षण पहले ही पूरे हो चुके हैं, जबकि रडार और EW सिस्टम अंतिम चरण में हैं।

अप्रैल में डेटा की व्यापक समीक्षा के बाद स्वीकृति ट्रायल्स शुरू होंगे, जो कई हफ्तों तक चल सकते हैं। देरी भी बड़ा मुद्दा बनी हुई है। करीब दो साल की देरी के पीछे GE इंजन सप्लाई को कारण माना जा रहा है। HAL का कहना है कि पांच विमान पूरी तरह तैयार हैं और मंजूरी मिलते ही डिलीवरी तेज की जाएगी। हाल में जारी तस्वीरों में तेजस Mk1A पर ASRAAM मिसाइल की दोहरी तैनाती दिखाई गई है, जिससे मारक क्षमता बढ़ने का दावा किया जा रहा है। वायुसेना नए विमानों को जल्द शामिल करना चाहती है, लेकिन साफ कर दिया गया है कि लड़ाकू क्षमता से कोई समझौता नहीं होगा। ट्रायल्स की सफलता के बाद ही अंतिम फैसला लिया जाएगा, जो देश की हवाई ताकत बढ़ाने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। इस पूरी प्रक्रिया पर रक्षा विशेषज्ञों की नजर भी टिकी हुई है, क्योंकि यह परियोजना भविष्य की रणनीति को सीधे प्रभावित करती है और सीमाओं की सुरक्षा को मजबूत बनाने में अहम


















