नई दिल्ली, 31 मार्च (अशोक “अश्क”) बॉलीवुड के सुनहरे दौर में 70-80 के दशक में ऐसे मौके बेहद कम आए, जब किशोर कुमार और मोहम्मद रफी जैसे दो दिग्गज एक ही गीत में साथ सुनाई दिए हों। 1981 में रिलीज हुई क्रांति ने यही करिश्मा कर दिखाया और इतिहास रच दिया।इस फिल्म का संगीत लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल ने तैयार किया, जो आज भी सदाबहार माना जाता है।

फिल्म का लोकप्रिय गीत “चना जोर गरम बाबू मैं लाया मजेदार” खास इसलिए बना क्योंकि इसमें किशोर कुमार, मोहम्मद रफी, लता मंगेशकर और नितिन मुकेश की संयुक्त आवाज़ सुनाई दी—जो अपने आप में बेहद दुर्लभ है।फिल्म में दिलीप कुमार, मनोज कुमार, शशि कपूर, शत्रुघ्न सिन्हा और हेमा मालिनी जैसे सितारों की दमदार मौजूदगी थी। कहानी सलीम-जावेद ने लिखी थी, जिसने इसे और खास बना दिया।दिलचस्प बात यह है कि फिल्म बनाने के लिए मनोज कुमार को काफी संघर्ष करना पड़ा। डिस्ट्रीब्यूटर्स ने दिलीप कुमार के “डाउन मार्केट” का हवाला देकर हाथ खींच लिए, लेकिन मनोज कुमार ने हार नहीं मानी और अपनी संपत्ति बेचकर फिल्म पूरी की।रिलीज के बाद ‘क्रांति’ ने बॉक्स ऑफिस पर धमाका कर दिया और शोले का रिकॉर्ड भी तोड़ दिया। करीब 16 करोड़ की कमाई के साथ यह उस साल की सबसे बड़ी ब्लॉकबस्टर साबित हुई।हालांकि, इस फिल्म की सफलता के साथ ही दिलीप कुमार और मनोज कुमार के रिश्तों में दरार भी आ गई, जो कभी भर नहीं सकी। फिर भी ‘क्रांति’ और उसके गीत आज भी बॉलीवुड इतिहास में सुनहरे अक्षरों में दर्ज हैं।
















