बक्सर, 03 नवंबर (विक्रांत) गोकुल जलाशय की जैव विविधता और प्राकृतिक संपदा को बचाने के लिए वन विभाग ने बड़ी पहल की है। जलाशय के समेकित प्रबंधन और संरक्षण योजना को जमीन पर उतारने के उद्देश्य से 3 और 4 नवंबर को दो दिवसीय कार्यशाला आयोजित की जा रही है। भोजपुर वन प्रमंडल, आरा द्वारा आयोजित इस कार्यशाला में वेटलैंड्स इंटरनेशनल साउथ एशिया (डब्ल्यूआईएसए) तकनीकी सहयोग प्रदान कर रहा है। कार्यशाला का शुभारंभ उप विकास आयुक्त निहारिका छवि, वन प्रमंडल पदाधिकारी प्रद्युम्न गौरव, अपर समाहर्ता अरुण कुमार सिंह तथा डब्ल्यूआईएसए के आर्द्रभूमि विशेषज्ञ रवि प्रकाश और सरोज कुमार बारीक ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया।

उप विकास आयुक्त निहारिका छवि ने कहा कि गोकुल जलाशय का संरक्षण और संवर्धन सभी संबंधित विभागों, जनप्रतिनिधियों और आम नागरिकों की सामूहिक जिम्मेदारी है। इसके प्रभावी प्रबंधन के लिए विभागों के बीच समन्वय और जनभागीदारी जरूरी है। वन प्रमंडल पदाधिकारी प्रद्युम्न गौरव ने कहा कि गोकुल जलाशय महत्वपूर्ण आर्द्रभूमि पारिस्थितिकी तंत्र है। समेकित प्रबंधन योजना के जरिए इसकी जैव विविधता, जलीय पारिस्थितिकी और प्राकृतिक संसाधनों को संरक्षित करने का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने स्थानीय समुदायों और संस्थाओं से सक्रिय सहयोग की अपील की। अपर समाहर्ता अरुण कुमार सिंह ने जलाशय के प्राकृतिक स्वरूप और पारिस्थितिक संतुलन को बनाए रखते हुए योजनाबद्ध विकास पर जोर दिया। कार्यशाला के पहले दिन विशेषज्ञ रवि प्रकाश ने विभिन्न विभागों के अधिकारियों के साथ समेकित प्रबंधन योजना पर विस्तृत चर्चा की।

संरक्षण गतिविधियों की प्राथमिकता, चरणबद्ध क्रियान्वयन, विभागीय जिम्मेदारियों और आपसी समन्वय पर विचार-विमर्श हुआ। प्रतिभागियों से सुझाव भी लिए गए। कार्यशाला में आसपास की पंचायतों के मुखिया, सरकारी विभागों के प्रतिनिधि, गैर-सरकारी और सामाजिक संगठनों तथा स्थानीय समुदाय के सदस्य शामिल हुए। 4 नवंबर को प्रबंधन प्रभावशीलता आकलन उपकरण पर प्रशिक्षण और व्यावहारिक अभ्यास होगा। इससे जलाशय के मौजूदा प्रबंधन की समीक्षा और सुधारात्मक उपायों की पहचान की जाएगी। पहल से गोकुल जलाशय के दीर्घकालिक संरक्षण और सतत प्रबंधन को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।














