पटना, 17 अक्टूबर (पटना डेस्क) किशनगंज जिले में कम जमीन में अधिक उत्पादन और महिला किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए जिले में बहुस्तरीय खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है। प्रदान संस्था और जिला कृषि कार्यालय के सहयोग से पहले चरण में सीमावर्ती क्षेत्र की 29 पंचायतों की 500 महिलाओं को इस खेती से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। महिलाओं को प्रशिक्षण देने के साथ कुछ गांवों में मॉडल के तहत खेती की शुरुआत भी कराई जा रही है। जिला कृषि पदाधिकारी प्रभात कुमार ने बताया कि बहुस्तरीय खेती में एक ही खेत में जमीन के नीचे, सतह पर, ऊंचाई और मेड़ पर अलग-अलग फसलों का उत्पादन किया जाता है।

मिट्टी के अंदर अदरक और हल्दी, सतह पर हरी सब्जियां, जबकि बांस और तार के सहारे लौकी व खीरा जैसी लतावर्गीय सब्जियां उगाई जा सकती हैं। खेत की मेड़ पर पपीता और सहजन के पौधे लगाने का प्रावधान है।इस पद्धति से सीमित जमीन का अधिकतम उपयोग संभव होगा। साथ ही किसान एक ही खेत से कई फसलों के जरिए आय अर्जित कर सकेंगे। किसी एक फसल के उत्पादन या बाजार भाव में गिरावट आने पर दूसरी फसल से होने वाली आमदनी नुकसान की भरपाई में मदद करेगी। तैयार मॉडल के अनुसार, 10 डिसमिल जमीन से सालाना करीब 80 से 90 हजार रुपये की कुल आमदनी का अनुमान है।

खरीफ में 45 से 50 हजार और रबी मौसम में 35 से 40 हजार रुपये तक कमाई का आकलन किया गया है। इस खेती के लिए बांस, तार, बीज-पौधे, गोबर खाद, सिंचाई और नियमित देखभाल जरूरी है। प्रशिक्षण के जरिए महिलाओं को तकनीक और फसल प्रबंधन की जानकारी दी जा रही है। जिला पदाधिकारी के निर्देशन में शुरू हुई यह पहल ग्रामीण महिलाओं के लिए आत्मनिर्भरता और अतिरिक्त आमदनी का नया रास्ता खोल सकती है।
















