गोरखपुर, 08 मई (अंकित यादव) डिजिटल पेमेंट के दौर में साइबर जालसाजों ने ठगी का ऐसा खेल खेला कि कंपनी को करोड़ों रुपये का चूना लग गया। यूपीआई के जरिए केवल एक रुपया ट्रांसफर कर लाखों रुपये के भुगतान का फर्जी स्क्रीनशॉट तैयार किया जाता था और इसी चालबाजी से करीब 24 करोड़ रुपये की ठगी को अंजाम दिया गया। वित्तीय ऑडिट में पूरे फर्जीवाड़े का खुलासा होने के बाद कोर्ट के आदेश पर गुलरिहा थाना पुलिस ने 21 नामजद आरोपितों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है।रेल विहार फेज-1 निवासी व्यवसायी विश्वजीत श्रीवास्तव ने कोर्ट में दिए प्रार्थना पत्र में बताया कि वर्ष 2023 में उनकी मुलाकात कुशीनगर निवासी सोनू जायसवाल से हुई थी।

बाद में सोनू ने अपने रिश्तेदार शिवम जायसवाल से परिचय कराया, जिसने खुद को दिल्ली का अनुभवी मार्केटिंग कारोबारी बताया। दोनों कंपनी के एजेंट के रूप में काम करने लगे और निवेशकों को जोड़ने का जिम्मा संभाल लिया। आरोप है कि जालसाजों ने गूगल-पे, फोन-पे और बैंक ट्रांजेक्शन के फर्जी स्क्रीनशॉट बनाकर कंपनी के अकाउंटेंट को भेजने शुरू कर दिए। स्क्रीनशॉट देखकर कंपनी रकम जमा मान लेती थी, जबकि वास्तविक खाते में पैसा पहुंचता ही नहीं था। जांच में सामने आया कि कई बार आरोपित एक लाख रुपये भेजने के नाम पर केवल एक रुपया ट्रांसफर करते थे और फिर मोबाइल व लैपटॉप की मदद से लाखों रुपये जमा होने का फर्जी स्क्रीनशॉट तैयार कर देते थे। करीब तीन महीने तक इसी तरीके से करोड़ों रुपये की ठगी की गई।

पीड़ित ने गोपालगंज निवासी सुदामा कुशवाहा और राहुल कुमार उर्फ मन्नू पर ढाई-ढाई करोड़ रुपये, जबकि जमशेदपुर निवासी विनोद प्रसाद, अविनाश प्रसाद और कुशीनगर निवासी चंदन शर्मा पर करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी का आरोप लगाया है। कई अन्य आरोपितों पर भी लाखों से करोड़ों रुपये की ठगी करने का आरोप है। पीड़ित का कहना है कि स्थानीय पुलिस से शिकायत के बावजूद कार्रवाई नहीं हुई, जिसके बाद कोर्ट की शरण लेनी पड़ी। कोर्ट के आदेश पर पुलिस ने आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, जालसाजी और आईटी एक्ट के तहत केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। रवि कुमार सिंह ने कहा कि साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।


















