पटना, 14 सितम्बर (अविनाश कुमार) सुहागिन महिलाओं और अविवाहित युवतियों के लिए विशेष महत्व रखने वाला हरतालिका तीज व्रत इस वर्ष 14 सितंबर को ब्रह्म योग में मनाया जाएगा। धार्मिक मान्यता के अनुसार यह व्रत बेहद कठिन माना जाता है, क्योंकि व्रती सूर्योदय से अगले दिन सूर्योदय तक निर्जला उपवास रखती हैं। इस दिन माता पार्वती, भगवान शिव और भगवान गणेश की विधि-विधान से पूजा की जाती है। मान्यता है कि शिव-गौरी की कृपा से सुहागिनों को अखंड सौभाग्य और अविवाहित युवतियों को मनचाहा योग्य जीवनसाथी प्राप्त होता है।हरतालिका तीज की पूजा में व्रत कथा सुनने का विशेष महत्व बताया गया है। धार्मिक कथा के अनुसार इस व्रत की शुरुआत स्वयं माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए की थी।कथा के अनुसार भगवान शिव ने माता पार्वती को उनके पूर्वजन्म की कहानी सुनाते हुए बताया कि सती के आत्मदाह के बाद उन्होंने हिमालयराज के घर पुत्री के रूप में जन्म लिया।

समय बीतने के साथ पार्वती बड़ी हुईं। इसी दौरान नारद मुनि हिमालयराज के पास पहुंचे और भगवान विष्णु से पार्वती के विवाह का प्रस्ताव रखा। हिमालयराज इस प्रस्ताव से प्रसन्न होकर सहमत हो गए।जब पार्वती को इसकी जानकारी मिली तो वह दुखी हो गईं। उन्होंने अपनी सखियों से कहा कि वह भगवान शिव को ही पति के रूप में चाहती हैं। अपनी सहेलियों की मदद से वह महल छोड़कर घने जंगल की गुफा में चली गईं, ताकि उनका विवाह भगवान विष्णु से न हो सके।गुफा में पार्वती ने रेत से शिवलिंग बनाया और भगवान शिव की आराधना शुरू कर दी। उन्होंने कठोर तपस्या करते हुए अन्न, जल और फूल तक का त्याग कर दिया। कठिन परिस्थितियों, आंधी-बारिश और भूख के बावजूद उनका संकल्प नहीं टूटा। लंबे समय तक तपस्या के बाद भगवान शिव उनके सामने प्रकट हुए और वरदान मांगने को कहा।

पार्वती ने शिव को पति रूप में पाने की इच्छा जताई। भोलेनाथ ने उनकी मनोकामना पूरी करने का आशीर्वाद दिया। बाद में हिमालयराज भी वहां पहुंचे। पार्वती ने उन्हें अपनी इच्छा बताई, जिस पर उन्होंने महादेव से विवाह के लिए सहमति दे दी। इसके बाद विधि-विधान से भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ।इसी आस्था के कारण हरतालिका तीज पर महिलाएं श्रद्धापूर्वक शिव-पार्वती की पूजा कर अखंड सौभाग्य और सुखी दांपत्य की कामना करती हैं।
















