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शराबबंदी पर मचा सियासी घमासान: NCAER की रिपोर्ट ने खोली बहस की नई बोतल, 15% तक बढ़ सकता है बिहार का राजस्व

पटना, 12 अगस्त (अविनाश कुमार) बिहार में पूर्ण शराबबंदी लागू होने के करीब एक दशक बाद इसे लेकर एक शोध रिपोर्ट ने प्रदेश की सियासत में हलचल तेज कर दी है। देश के प्रमुख आर्थिक शोध संस्थानों में शामिल नेशनल काउंसिल ऑफ एप्लाइड इकोनॉमिक रिसर्च (NCAER) की एक स्टडी में पूर्ण शराबबंदी खत्म कर नियंत्रित तरीके से शराब की बिक्री शुरू करने और आबकारी कर व्यवस्था बहाल करने की सिफारिश की गई है। रिपोर्ट के अनुसार, ऐसा होने पर बिहार के अपने राजस्व में करीब 14 से 15 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हो सकती है। रिपोर्ट में शराबबंदी के बाद अवैध शराब की तस्करी, दूसरे नशीले पदार्थों के इस्तेमाल और कानून के प्रभावी क्रियान्वयन में सामने आ रही चुनौतियों का भी उल्लेख किया गया है।

रिपोर्ट सार्वजनिक होने के बाद अब बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या भाजपा नेतृत्व वाली सम्राट चौधरी सरकार शराबबंदी नीति में कोई बड़ा बदलाव करेगी और क्या मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जदयू इसके लिए तैयार होगी। हालांकि, सत्तारूढ़ गठबंधन में फिलहाल शराबबंदी खत्म करने को लेकर स्पष्ट सहमति नजर नहीं आ रही है। जदयू की ओर से शराबबंदी की समीक्षा या इसे समाप्त करने की संभावना को खारिज किया गया है। शराबबंदी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की राजनीतिक विरासत और सामाजिक सुधार के प्रमुख एजेंडे का हिस्सा रही है। अप्रैल 2016 में तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने महिलाओं की मांग और सामाजिक सुधार को आधार बनाकर बिहार में पूर्ण शराबबंदी लागू की थी। इधर, हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा के प्रमुख और केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी लंबे समय से शराबबंदी कानून के क्रियान्वयन पर सवाल उठाते रहे हैं।

रिपोर्ट के बाद उन्होंने गुजरात की तर्ज पर बिहार में शराबबंदी लागू करने की बात कही। वहीं राजद विधायक भाई वीरेंद्र ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि शराबबंदी बिना पर्याप्त सर्वे के लागू की गई थी। उन्होंने नेपाल, झारखंड और छत्तीसगढ़ की सीमाओं से होने वाली शराब तस्करी रोकने के लिए सख्त कदम उठाने की मांग की।भाजपा प्रवक्ता कुंतल कृष्ण ने कहा कि विभिन्न शोध संस्थानों की रिपोर्टों पर सरकार विचार करती है। शराबबंदी का फैसला सामूहिक था और 2016 में लगभग सभी दलों ने इसका समर्थन किया था। उन्होंने कहा कि नीति की समय-समय पर समीक्षा होती रही है और नई रिपोर्ट पर भी विचार किया जाएगा। आगे का फैसला कैबिनेट सामूहिक रूप से करेगी। फिलहाल बिहार में पूर्ण शराबबंदी लागू है, लेकिन NCAER की रिपोर्ट ने इसके आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक प्रभावों पर बहस जरूर तेज कर दी है।

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