नई दिल्ली, 02 अप्रैल (अशोक “अश्क”) डेनिस मंटुरोव दो दिवसीय भारत दौरे पर राजधानी पहुंचे, जहां एयरपोर्ट पर उनका गर्मजोशी से स्वागत किया गया। यह दौरा ऐसे समय हो रहा है जब वैश्विक राजनीति में अमेरिका, रूस और भारत के रिश्तों को लेकर नई बहस छिड़ी हुई है।मंटुरोव भारत-रूस अंतरसरकारी आयोग के सह-अध्यक्ष भी हैं और अपने इस दौरे के दौरान वे कई अहम बैठकों में हिस्सा लेंगे।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने जानकारी दी कि रूसी उप प्रधानमंत्री, विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ व्यापक वार्ता करेंगे। इसके अलावा वे वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोवाल से भी मुलाकात करेंगे। इन बैठकों में व्यापार, ऊर्जा, तकनीकी सहयोग और रणनीतिक साझेदारी जैसे मुद्दों पर गहन चर्चा होने की संभावना है। खास तौर पर ऊर्जा क्षेत्र में भारत-रूस संबंध तेजी से मजबूत हो रहे हैं, जिस पर दुनिया की नजरें टिकी हैं।

इस बीच, भारत पहुंचने से ठीक पहले डेनिस अलिपोव ने बड़ा बयान देकर कूटनीतिक माहौल को और गर्म कर दिया। उन्होंने साफ कहा कि रूस अंतरराष्ट्रीय राजनीति में किसी भी तरह के “अमेरिकी दबाव” को पूरी तरह खारिज करता है। अलिपोव ने आरोप लगाया कि अमेरिका भारत के बाजार में रूस के लिए बाधाएं खड़ी करने की कोशिश कर रहा है, खासकर तेल व्यापार को लेकर। उन्होंने कहा कि यह अंतरराष्ट्रीय व्यापार के सिद्धांतों के खिलाफ है। साथ ही उन्होंने भारत की स्वतंत्र विदेश नीति की सराहना करते हुए कहा कि नई दिल्ली किसी दबाव में आने वाली नहीं है। गौरतलब है कि हाल के समय में भारत ने रूस से तेल आयात में उल्लेखनीय बढ़ोतरी की है, जिससे दोनों देशों के आर्थिक संबंध और मजबूत हुए हैं। मंटुरोव का यह दौरा न सिर्फ द्विपक्षीय संबंधों को नई दिशा दे सकता है, बल्कि वैश्विक शक्ति संतुलन पर भी इसका बड़ा असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है।
















