पटना, 02 अगस्त (पटना डेस्क) अयोध्या राम मंदिर में कथित चंदा चोरी के मुद्दे को लेकर संसद परिसर में किए गए सांकेतिक विरोध प्रदर्शन के बाद पूर्णिया से निर्दलीय सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गए हैं। देश के विभिन्न राज्यों में उनके खिलाफ शिकायतें और एफआईआर दर्ज कराने की पहल के बीच पप्पू यादव ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वे किसी भी कानूनी कार्रवाई या राजनीतिक दबाव से डरने वाले नहीं हैं। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि यदि सच बोलने की कीमत चुकानी पड़े तो वे उसके लिए भी तैयार हैं। मीडिया से बातचीत के दौरान पप्पू यादव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब देशभर में लोग राम मंदिर के कथित चंदा मामले पर जवाब मांग रहे हैं, तब भी प्रधानमंत्री मौन हैं।

उन्होंने कहा कि यह मुद्दा केवल राजनीति का नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा है। इसलिए वह किसी भी परिस्थिति में इस विषय को उठाना बंद नहीं करेंगे। पप्पू यादव ने कहा कि उनके खिलाफ चाहे जितनी एफआईआर दर्ज करा दी जाए या किसी भी प्रकार की कार्रवाई कर ली जाए, इससे उनके इरादे कमजोर नहीं होंगे। उन्होंने कहा, “जरूरत पड़ी तो गोली भी खानी पड़े, तो खा लूंगा, लेकिन सच बोलना नहीं छोड़ूंगा।” उन्होंने भाजपा नेताओं पर निशाना साधते हुए कहा कि जहां चाहें शिकायत दर्ज कराएं, उन्हें इसकी कोई परवाह नहीं है। सत्ताधारी दल के नेताओं द्वारा उन्हें “नौटंकीबाज” कहे जाने पर भी पप्पू यादव ने पलटवार किया।

उन्होंने कहा कि आज जो नेता उन पर आरोप लगा रहे हैं, उनमें से कई कभी उनके साथ राजनीति करते थे और कुछ उनके सहयोगी भी रह चुके हैं। मंत्री बनने पर उन्होंने उन्हें बधाई दी, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि सार्वजनिक जीवन में अपने राजनीतिक अतीत को नहीं भूलना चाहिए। अपने बयान के दौरान पप्पू यादव ने खुद को जनता का सच्चा सेवक बताते हुए कहा कि उन्होंने हमेशा संकट की घड़ी में लोगों का साथ दिया है। उन्होंने कहा कि चाहे पुलिस मुठभेड़ में मारे गए लोगों के परिजनों की मदद का मामला हो या कोविड-19 महामारी के दौरान जरूरतमंदों तक राहत पहुंचाने का कार्य, वे हमेशा जनता के बीच खड़े रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि उनकी राजनीति सत्ता नहीं, बल्कि सेवा और जनहित के लिए है।














