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मुहर्रम अलर्ट की खुली पोल: सदर अस्पताल में 21 डॉक्टर गायब, सर्जन के नहीं मिलने से गोलीकांड का मरीज रेफर

नालंदा, 27 जून (अविनाश पांडेय) मुहर्रम पर्व को लेकर स्वास्थ्य विभाग को पूरी तरह ‘रेडी मोड’ में रहने के निर्देशों की शुक्रवार देर शाम बिहारशरीफ सदर अस्पताल में खुलकर धज्जियां उड़ती नजर आईं। जिलाधिकारी उदिता सिंह के निर्देश पर अपर समाहर्ता राजीव रंजन कुमार सिन्हा एवं उप विकास आयुक्त रंजन कुमार चौधरी द्वारा किए गए औचक निरीक्षण में अस्पताल की व्यवस्था की कई गंभीर खामियां उजागर हुईं। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि अस्पताल में पदस्थापित 48 चिकित्सकों में से 21 डॉक्टर ड्यूटी से नदारद मिले।निरीक्षण की शुरुआत आकस्मिक (इमरजेंसी) विभाग से हुई, जहां केवल डॉ. संत कुमार, डॉ. महेंद्र कुमार और डॉ. सावन सुमन ही ड्यूटी पर मौजूद मिले।

वहीं ऑपरेशन थिएटर में तैनात डॉ. संजीव कुमार और डॉ. राजीव रंजन अनुपस्थित पाए गए। अधिकारियों ने जब उपस्थिति पंजी की जांच की तो बड़ी संख्या में चिकित्सकों की गैरहाजिरी सामने आई।निरीक्षण के दौरान एक दिन पूर्व गोली लगने से घायल त्रिभुवन पंडित के इलाज में हुई गंभीर लापरवाही भी उजागर हुई। घायल को सदर अस्पताल लाया गया था, लेकिन सर्जन उपलब्ध नहीं होने के कारण उसे बेहतर इलाज के लिए रेफर करना पड़ा। हैरानी की बात यह रही कि इमरजेंसी मरीज पंजी में उसका नाम तक दर्ज नहीं था। अधिकारियों ने इसे गंभीर प्रशासनिक चूक मानते हुए कड़ी नाराजगी जताई।अस्पताल में रोस्टर व्यवस्था भी सवालों के घेरे में रही। चिकित्सकों की ड्यूटी सूची समय पर उपलब्ध नहीं कराई जा सकी।

बाद में दूसरा रोस्टर प्रस्तुत किए जाने पर अधिकारियों ने संदेह जताया कि अस्पताल में दो-दो रोस्टर तैयार किए जा रहे हैं। पूरे मामले की जांच के निर्देश दिए गए हैं।निरीक्षण के दौरान कई बेड गंदे मिले। जनरल वार्ड के मरीजों ने समय पर भोजन नहीं मिलने की शिकायत की, जबकि प्रसूति वार्ड की एक महिला ने दवा नहीं मिलने के कारण डिस्चार्ज के बाद भी अस्पताल में रुकने की मजबूरी बताई। एएनसी वार्ड में भी मरीजों ने आवश्यक सुविधाओं के अभाव की शिकायत की। एम्बुलेंस संचालन का अलग रिकॉर्ड भी अस्पताल प्रबंधन प्रस्तुत नहीं कर सका।निरीक्षण के बाद अधिकारियों ने सिविल सर्जन और अस्पताल प्रबंधन को नियमित मॉनिटरिंग, चिकित्सकों व नर्सिंग स्टाफ की शत-प्रतिशत उपस्थिति, साफ-सफाई, समय पर भोजन व दवा उपलब्ध कराने, सर्पदंश की दवाओं का पर्याप्त भंडारण सुनिश्चित करने तथा सभी कमियों को तत्काल दूर करने का निर्देश दिया। साथ ही अनुपस्थित चिकित्सकों एवं संबंधित कर्मियों के विरुद्ध नियमानुसार अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई।

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