पटना, 03 जून (अविनाश कुमार) बिहार सरकार ने राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार और अनियमितताओं पर बड़ा प्रहार करते हुए मंगलवार को आठ अंचल अधिकारियों एवं राजस्व अधिकारियों के खिलाफ कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की है। राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल के अनुमोदन के बाद विभाग ने कई अधिकारियों पर विभागीय कार्रवाई, आरोप पत्र गठन, वेतन वृद्धि पर रोक और विशेष जांच जैसे सख्त कदम उठाए हैं। इस कार्रवाई से विभागीय महकमे में हड़कंप मच गया है।

मंत्री डॉ. जायसवाल ने स्पष्ट संदेश दिया है कि सरकारी भूमि, दाखिल-खारिज, परिमार्जन और राजस्व प्रशासन से जुड़े मामलों में भ्रष्टाचार, गड़बड़ी या लापरवाही किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि विभाग की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के तहत दोषी अधिकारियों के खिलाफ लगातार कार्रवाई जारी रहेगी। कार्रवाई की जद में रोहतास जिले के डिहरी की तत्कालीन अंचल अधिकारी एवं वर्तमान में सेवानिवृत्त सीमा रानी भी आई हैं। उन पर सरकारी भूमि से संबंधित अभिलेखों में जालसाजी, सरकारी जमीन के बंदरबांट के मामले को गंभीरता से नहीं लेने, दाखिल-खारिज आदेश का अनुपालन नहीं करने तथा नियमों के विरुद्ध अपने पसंदीदा कर्मी को लाभ पहुंचाने के आरोप हैं।

उनके विरुद्ध विभागीय कार्यवाही चलाने का निर्णय लिया गया है।औरंगाबाद के तत्कालीन राजस्व अधिकारी एवं वर्तमान में बक्सर के इटाढ़ी अंचल अधिकारी संतोष कुमार प्रीतम को गैरमजरूआ भूमि को रैयती बताकर दाखिल-खारिज की अनुशंसा करने के मामले में दोषी पाए जाने पर एक वेतन वृद्धि रोकने की सजा दी गई है।गोपालगंज के बरौली के तत्कालीन राजस्व अधिकारी विजय कुमार सिंह, जिन्हें जनवरी 2026 में रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया गया था, उनके खिलाफ आरोप पत्र गठित किया गया है। वहीं मुजफ्फरपुर के मोतीपुर की तत्कालीन अंचल अधिकारी रूचि कुमारी पर बियाडा की भूमि को निजी व्यक्ति के नाम दर्ज कराने के आरोपों की जांच के लिए दो सदस्यीय विशेष जांच दल बनाया गया है।इसके अलावा चंदन कुमार, उदय शंकर मिश्रा, राजा कुमार और विनोद कुमार मिश्रा के विरुद्ध भी विभिन्न भूमि एवं राजस्व मामलों में गंभीर अनियमितताओं को लेकर आरोप पत्र गठित किए गए हैं।गौरतलब है कि 27 मई को 14 अधिकारियों और 1 जून को एक अन्य अंचल अधिकारी पर कार्रवाई के बाद अब एक सप्ताह में कुल 23 अधिकारियों पर विभागीय गाज गिर चुकी है, जिससे पूरे राजस्व विभाग में जवाबदेही और पारदर्शिता को लेकर नई बहस छिड़ गई है।













