बेतिया, 25 अगस्त (विनय कुमार गुप्ता) भारत-नेपाल सीमा पर सुस्ता गांव के समीप गंडक नदी के लगातार बढ़ते कटाव ने सुरक्षा और सीमा प्रबंधन की चिंता बढ़ा दी है। नेपाल की ओर तटबंध के विस्तार और सुदृढ़ीकरण के बाद गंडक की धारा भारतीय क्षेत्र की ओर मुड़ने की आशंका जताई जा रही है। इससे सीमा से सटे भारतीय इलाके में तेज कटाव शुरू हो गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए सशस्त्र सीमा बल (SSB) के महानिदेशक संजय सिंघल ने बिहार के मुख्य सचिव और प्रमंडलीय आयुक्त को पत्र भेजकर तत्काल कार्रवाई की मांग की है। SSB महानिदेशक के पत्र के अनुसार, दो अगस्त को नेपाल के सुस्ता गांव के कुछ नागरिकों ने असामाजिक तत्वों के सहयोग से यथास्थिति रेखा का उल्लंघन करते हुए तटबंध का विस्तार करने का प्रयास किया था। पूर्व में दोनों पक्षों के बीच सहमति बनी थी कि यथास्थिति रेखा का उल्लंघन नहीं किया जाएगा और इसके समीप तटबंध निर्माण भी नहीं किया जाएगा। इसके बावजूद भारतीय क्षेत्र की ओर तटबंध बढ़ाने का प्रयास किया गया।

सूचना मिलने के बाद स्थिति को तत्काल पूर्ववत कराया गया। गंडक की धारा बदली तो मिट सकता है अहम पहचान बिंदु 12 अगस्त को तेज जलधारा के कारण गंडक नदी के प्रवाह मार्ग में बदलाव की जानकारी सामने आई। इसके बाद नदी के पूर्वी किनारे स्थित धनैयारेता और भारतीय क्षेत्र में तेजी से कटाव होने लगा। कटाव की चपेट में यथास्थिति रेखा पर स्थित महत्वपूर्ण पहचान बिंदु पाकड़ का पेड़ भी आ गया और वह उखड़कर नदी में समा गया। फिलहाल कटाव सेमल के पेड़ की दिशा में बढ़ रहा है। SSB ने आशंका जताई है कि यदि नदी की वर्तमान धारा आगे चलकर मुख्य धारा में तब्दील होती है तो वर्ष 2005 से SSB द्वारा अनुरक्षित यथास्थिति रेखा और सुस्ता से सटे भारतीय क्षेत्र के जलमग्न होने का खतरा पैदा हो सकता है।

विशेषज्ञ समिति बनाने की मांग SSB महानिदेशक ने भारतीय क्षेत्र में जारी कटाव को रोकने के लिए विशेषज्ञ समिति गठित कर तत्काल आवश्यक कदम उठाने का आग्रह किया है। सीमा सुरक्षा के साथ भारतीय भू-भाग को बचाना अब प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। मामले को गंभीरता से लेते हुए प्रमंडलीय आयुक्त गिरिवर दयाल सिंह ने पश्चिमी चंपारण के जिलाधिकारी को आवश्यक कार्रवाई का निर्देश दिया है। इस संबंध में आठ सितंबर को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक भी बुलाई गई है। SSB ने सुस्ता क्षेत्र में सीमा चौकी चकदावा, रामपुरवा और झेंडूटोला से यथास्थिति रेखा तक बारहमासी सड़क बनाने का भी आग्रह किया है। इसके अलावा चकदावा सीमा चौकी से हरिद्वार पुल तथा हरिद्वार पुल से झेंडूटोला गांव तक सड़क निर्माण की मांग रखी गई है। कटाव की रफ्तार और नदी की बदलती धारा को देखते हुए अब प्रशासन की त्वरित कार्रवाई पर सबकी नजर है।














