पटना, 09 अप्रैल (अविनाश कुमार) रोहतास जिले के कोआथ प्रखंड, वार्ड संख्या 2: कहते हैं बदलाव की शुरुआत एक सोच से होती है, और इसी सोच को हकीकत में बदलकर योगिनी निवासी संदीप दुबे ने अपने गांव में मिसाल पेश की है। भारतीय नौसेना में कार्यरत संदीप ने महानगरों में बिहार के प्रवासियों की कठिनाइयों और उनके साथ होने वाले व्यवहार को करीब से देखा। इस अनुभव ने उन्हें अपने गांव में रोजगार सृजन का संकल्प दिलाया। संदीप ने अपने खेत में मिट्टी के प्याले (कुल्हड़) बनाने का प्लांट स्थापित किया।

वर्तमान में इस उद्योग के माध्यम से 10 से 15 लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिल रहा है। इसके अलावा, संदीप ने पारंपरिक खेती से आगे बढ़ते हुए बीघे भर जमीन में ताइवान नस्ल के पपीते की खेती शुरू की है। उनका मानना है कि आधुनिक कृषि तकनीकों के जरिए कम जमीन से भी अधिक आय प्राप्त की जा सकती है, जिससे किसानों और मजदूरों की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ होगी। संदीप बताते हैं, “दिल्ली और मुंबई जैसे शहरों में अपने राज्य के लोगों की मजबूरी देखकर मन व्यथित होता था। तभी तय किया कि गांव में ही रोजगार के अवसर सृजित करने होंगे ताकि पलायन रुके।” उन्होंने स्पष्ट किया कि यह तो सिर्फ शुरुआत है।

वर्तमान में उनके साथ 15 लोग हैं, लेकिन भविष्य में 100 से 200 लोगों को रोजगार देने का लक्ष्य रखा गया है। उनका मानना है कि अगर बाहर कार्यरत लोग अपनी क्षमतानुसार गांव में निवेश या उद्योग शुरू करें, तो बिहार की तस्वीर बदल सकती है। स्थानीय शिक्षक सुशील कुमार सिंह ने संदीप की पहल की सराहना करते हुए कहा, “अगर हर व्यक्ति संदीप जैसी सोच रखे, तो क्षेत्र का विकास तेजी से संभव है। यह युवाओं के लिए प्रेरणा है।”संदीप दुबे की यह पहल आज सिर्फ रोजगार का माध्यम नहीं रही, बल्कि आत्मनिर्भर गांव की दिशा में एक मजबूत कदम बन चुकी है। उनके प्रयास यह साबित करते हैं कि मजबूत इरादे से गांव की मिट्टी से ही विकास की नई कहानी लिखी जा सकती है।















