पटना, 03 जून (अविनाश कुमार) बिहार सरकार ने राज्य के सभी सरकारी सहायता एवं अनुदान प्राप्त मदरसों की व्यापक जांच कराने का फैसला लिया है। शिक्षा विभाग ने इस संबंध में सभी जिलाधिकारियों को निर्देश जारी कर दिए हैं। आदेश के तहत प्रत्येक प्रखंड में तीन सदस्यीय टीम गठित कर मदरसों का भौतिक सत्यापन कराया जाएगा। सरकार इसे वित्तीय पारदर्शिता और प्रशासनिक सुधार की दिशा में उठाया गया कदम बता रही है, जबकि विपक्ष इसे राजनीतिक ध्रुवीकरण का प्रयास करार दे रहा है।

शिक्षा विभाग के सचिव विनोद सिंह गुंजियाल द्वारा जारी निर्देश के अनुसार, जांच समिति की अध्यक्षता संबंधित प्रखंड के बीडीओ या सीओ करेंगे। प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी को सदस्य सचिव बनाया गया है, जबकि मुख्यालय स्थित किसी सरकारी माध्यमिक या उच्च माध्यमिक विद्यालय के वरिष्ठ प्रधानाध्यापक को तीसरे सदस्य के रूप में शामिल किया गया है। जिला शिक्षा अधिकारियों को तत्काल समिति गठन का निर्देश दिया गया है। माध्यमिक शिक्षा निदेशालय के पत्र के मुताबिक, टीमों को मदरसों का औचक निरीक्षण कर वास्तविक स्थिति का आकलन करना होगा। जांच पूरी होने के बाद 10 दिनों के भीतर विस्तृत रिपोर्ट मुख्यालय को सौंपनी होगी।

रिपोर्ट के साथ परिसर, भवन, कक्षाओं और शैक्षणिक गतिविधियों की तस्वीरें तथा अन्य साक्ष्य भी संलग्न करना अनिवार्य होगा। जांच का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि अभिलेखों में दर्ज छात्र संख्या और वास्तविक उपस्थिति में कोई अंतर तो नहीं है। साथ ही यह भी देखा जाएगा कि वेतन एवं मानदेय प्राप्त शिक्षक नियमित रूप से शिक्षण कार्य कर रहे हैं या नहीं। भवन, शौचालय, कक्षाओं सहित आधारभूत सुविधाओं का भी मूल्यांकन किया जाएगा। सरकार के अनुसार राज्य में 1,937 अनुदानित मदरसे हैं। हाल ही में पटना हाई कोर्ट में दायर याचिका में 609 मदरसों पर जाली दस्तावेजों के आधार पर सरकारी धन के गबन के आरोप लगाए गए थे, जिसके बाद जांच की आवश्यकता महसूस की गई।शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने चेतावनी दी है कि नियमों के विरुद्ध संचालित संस्थानों को बख्शा नहीं जाएगा। वहीं उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी ने स्पष्ट किया कि संस्कृत विद्यालयों और अन्य अनुदानित संस्थानों की भी इसी प्रकार समीक्षा की जा रही है, इसलिए इसे किसी विशेष समुदाय से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए।














