पटना, 26 अगस्त (पटना डेस्क) बिहार की धरती में छिपे खनिज खजाने को बाहर निकालने की कवायद अब तेज हो गई है। केंद्र से आवंटित 14 वृहद खनिज ब्लाकों को विकसित करने की प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ रही है। इनमें करीब 12 ब्लाक अलग-अलग चरणों में पहुंच चुके हैं। खान एवं भूतत्व विभाग अब इनकी प्रगति के आधार पर खनिज कैलेंडर में शामिल करने की तैयारी में जुट गया है। विभाग ने इस वर्ष छह से आठ ब्लाकों में खनन शुरू कराने का लक्ष्य तय किया है।इन खनिज ब्लाकों में निकेल, क्रोमियम, पीजीई, वैनेडियम मैग्नेटाइट, टिन, टंगस्टन, रेयर अर्थ, लाइम स्टोन, मैग्नेटाइट तथा कापर-लेड-जिंक जैसे महत्वपूर्ण खनिजों के भंडार हैं। इनसे आने वाले वर्षों में राज्य को बड़ा राजस्व मिलने की उम्मीद है।

खासकर रेयर अर्थ और अन्य रणनीतिक खनिजों की मौजूदगी बिहार के खनिज क्षेत्र के लिए अहम मानी जा रही है। रोहतास जिले के पिपराडीह-मुरवा ग्लूकोनाइट ब्लाक में अन्वेषण का काम तेज है। यहां 24 में से 23 बोरहोल की खुदाई पूरी हो चुकी है। चुटिया-नौहट्टा ब्लाक में भी 37 में से 20 बोरहोल पूरे किए जा चुके हैं। इसके अलावा दो खनिज ब्लाकों की नीलामी प्रक्रिया शुरू होने वाली है। विभाग पर्यावरण और वन संबंधी स्वीकृतियों को भी प्राथमिकता दे रहा है। कुछ ब्लाकों में आवश्यक मंजूरियों की प्रक्रिया जारी है, जबकि एक लाइम स्टोन ब्लाक की माइनिंग योजना को भारतीय खान ब्यूरो से स्वीकृति मिल चुकी है।

जरूरी प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद संबंधित ब्लाकों को खनिज कैलेंडर में शामिल किया जाएगा। सितंबर में दो जिलों के चार खनिज ब्लाकों की नीलामी प्रक्रिया शुरू होने की तैयारी है। इससे निवेश और खनन गतिविधियों को नई रफ्तार मिलने की उम्मीद है।विभागीय आकलन के मुताबिक कई ब्लाक करीब 50 वर्षों तक बिहार के लिए आय का बड़ा स्रोत बन सकते हैं। खनन शुरू होने से राजस्व बढ़ने के साथ स्थानीय रोजगार और आर्थिक गतिविधियों में भी इजाफा होने की संभावना है।













