पटना, 06 अगस्त (अविनाश कुमार) बिहार विधानसभा की बांकीपुर सीट पर हुए उपचुनाव के बूथवार नतीजों ने राज्य की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। आंकड़ों के अनुसार, जन सुराज पार्टी (जेएसपी) के उम्मीदवार प्रशांत किशोर ने भाजपा के मजबूत गढ़ में ऐसी सेंध लगाई कि बिहार सरकार के मंत्री रामकृपाल यादव और पूर्व केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद के मतदान केंद्रों पर भी उन्हें भाजपा प्रत्याशी नीरज सिन्हा से अधिक वोट मिले। हालांकि, नीरज सिन्हा अपने स्वयं के बूथ पर प्रशांत किशोर से आगे रहने में सफल रहे।बूथवार आंकड़ों के मुताबिक, 422 मतदान केंद्रों वाली बांकीपुर विधानसभा सीट पर प्रशांत किशोर ने 338 बूथों पर बढ़त हासिल की, जबकि भाजपा उम्मीदवार नीरज सिन्हा केवल 81 बूथों पर ही बढ़त बना सके।

तीन बूथ ऐसे भी रहे, जहां दोनों प्रत्याशियों को बराबर-बराबर वोट मिले। इन आंकड़ों ने भाजपा के परंपरागत वोट बैंक को लेकर कई नए सवाल खड़े कर दिए हैं। बांकीपुर विधानसभा सीट को पिछले 31 वर्षों से भाजपा का अभेद्य गढ़ माना जाता रहा है। पहले भाजपा के वरिष्ठ नेता नवीन किशोर प्रसाद सिन्हा और बाद में उनके पुत्र नितिन नवीन लगातार इस सीट से चुनाव जीतते रहे। लालू प्रसाद यादव के राजनीतिक प्रभाव के दौर में भी भाजपा इस सीट पर अपना कब्जा बरकरार रखने में सफल रही थी। लेकिन वर्ष 2026 के उपचुनाव में प्रशांत किशोर ने इस मजबूत किले को भेदते हुए बड़ा राजनीतिक संदेश दिया है। विश्लेषकों का मानना है कि स्थानीय मुद्दों, आक्रामक प्रचार अभियान और पारंपरिक राजनीति से अलग रणनीति के कारण प्रशांत किशोर को व्यापक जनसमर्थन मिला।

आंकड़े बताते हैं कि जिन 338 बूथों पर उन्हें बढ़त मिली, उनमें कई ऐसे क्षेत्र शामिल हैं जिन्हें लंबे समय से भाजपा का मजबूत आधार माना जाता था। वहीं, जिन 81 बूथों पर भाजपा आगे रही, वहां जीत का अंतर अपेक्षाकृत कम रहा। बूथवार परिणामों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि बांकीपुर की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। उपचुनाव के इन आंकड़ों ने न केवल भाजपा के संगठनात्मक ढांचे को चुनौती दी है, बल्कि आगामी विधानसभा चुनाव से पहले सभी राजनीतिक दलों के लिए नई रणनीति बनाने का संकेत भी दे दिया है।













