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बकिया बंधा डैम बना ‘खरबूजा गोल्डमाइन’, 1 एकड़ में लाखों की कमाई से बदली किसानों की तकदीर

नई दिल्ली, 02 अप्रैल (सेंट्रल डेस्क) बकिया बंधा डैम का इलाका अब सिर्फ जलाशय नहीं, बल्कि किसानों के लिए “खरबूजा हब” बनकर उभरा है। सतना जिले का यह क्षेत्र हर गर्मी में मीठे और उच्च गुणवत्ता वाले खरबूजों के उत्पादन के लिए देशभर में पहचान बना रहा है। करीब 5000 हेक्टेयर में फैले इस इलाके में 1000 से अधिक किसान मौसमी खेती कर रहे हैं।

डैम के किनारे की उपजाऊ मिट्टी और नमी भरा वातावरण खरबूज की खेती के लिए बेहद अनुकूल साबित हो रहा है। यही वजह है कि यहां उगने वाले फल रीवा समेत कई बाजारों में ऊंचे दामों पर बिकते हैं। स्थानीय किसान बताते हैं कि पहले यहां लौकी और खीरे जैसी फसलें उगाई जाती थीं, लेकिन बढ़ती मांग के चलते अब खरबूजे की खेती प्रमुख हो गई है। खास बात यह है कि यह जमीन साल में केवल 6 महीने ही खेती के लिए उपलब्ध रहती है, क्योंकि बाकी समय यह पानी में डूबी रहती है।

ऐसे में किसान कम समय में ज्यादा उत्पादन पर फोकस करते हैं। इस क्षेत्र में मधुराजा, सफेदा और अलीशा जैसी पारंपरिक किस्मों के साथ बॉबी, कुंदन और वीएनआर जैसी हाइब्रिड किस्में भी उगाई जा रही हैं। मधुराजा किस्म सबसे ज्यादा लोकप्रिय है और बाजार में बेहतर कीमत दिलाती है। आंकड़ों के मुताबिक, एक एकड़ में 15 से 20 हजार रुपये की लागत आती है, जबकि उत्पादन 100 से 150 क्विंटल तक पहुंचता है। बाजार में 15-20 रुपये प्रति किलो के भाव पर किसान 1.5 से 2.5 लाख रुपये तक का शुद्ध मुनाफा कमा रहे हैं। किसान अब ड्रिप सिंचाई और मल्चिंग जैसी आधुनिक तकनीकों को अपनाकर पानी की बचत और फसल की गुणवत्ता दोनों बढ़ा रहे हैं। 1980 में डैम निर्माण के बाद शुरू हुई यह खेती आज क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ बन चुकी है।

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