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बिहार की खेती में होगा बड़ा बदलाव: FOM तकनीक से मिट्टी बनेगी ताकतवर, किसानों की लागत घटाने की तैयारी

बक्सर, 10 जून (विक्रांत) बिहार में खेती को अधिक टिकाऊ, लाभकारी और पर्यावरण-अनुकूल बनाने की दिशा में एक बड़ी पहल शुरू हुई है। बिहार कृषि विश्वविद्यालय (बीएयू), सबौर ने फर्मेंटेड ऑर्गेनिक मैन्योर (FOM) तकनीक के वैज्ञानिक प्रमाणीकरण और व्यापक प्रसार के लिए राज्यस्तरीय कार्ययोजना तैयार की है। मारुति सुजुकी इंडिया लिमिटेड के सहयोग से संचालित इस महत्वाकांक्षी परियोजना के तहत मृदा स्वास्थ्य, पोषक तत्व दक्षता और जलवायु-स्मार्ट कृषि पर व्यापक अध्ययन किया जाएगा। विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित अभिमुखीकरण-सह-समीक्षा बैठक की अध्यक्षता निदेशक अनुसंधान एवं परियोजना के प्रधान अन्वेषक डॉ. ए. के. सिंह ने की।

बैठक में विभिन्न महाविद्यालयों, कृषि विज्ञान केंद्रों, अनुसंधान एवं प्रसार निदेशालयों से जुड़े वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों ने भाग लिया।बैठक में FOM तकनीक के वैज्ञानिक मूल्यांकन, बहु-स्थानिक परीक्षण, किसान सहभागिता आधारित प्रदर्शन, प्रशिक्षण कार्यक्रम और राज्यव्यापी विस्तार रणनीति पर विस्तृत चर्चा की गई। परियोजना के तहत बिहार के विभिन्न कृषि-जलवायु क्षेत्रों में इस तकनीक का मृदा स्वास्थ्य, सूक्ष्मजीवीय सक्रियता, कार्बनिक कार्बन, फसल उत्पादकता, उत्पादन लागत और पर्यावरणीय स्थिरता पर पड़ने वाले प्रभावों का अध्ययन किया जाएगा। कुलपति डॉ. डी. आर. सिंह ने कहा कि मृदा में जैविक पदार्थों की कमी, पोषक तत्व उपयोग दक्षता में गिरावट और जलवायु परिवर्तन जैसी चुनौतियां कृषि के सामने गंभीर संकट बनकर उभर रही हैं।

ऐसे में FOM जैसी जैविक तकनीकें मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने और रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। डॉ. ए. के. सिंह ने बताया कि FOM लाभकारी सूक्ष्मजीवों और जैव-सक्रिय तत्वों से समृद्ध उन्नत जैविक पोषक प्रबंधन तकनीक है। इसके प्रभावों का वैज्ञानिक दस्तावेजीकरण कर बिहार की कृषि प्रणालियों के लिए प्रमाण-आधारित अनुशंसाएं तैयार की जाएंगी।विशेषज्ञों का मानना है कि यह परियोजना मृदा स्वास्थ्य पुनर्स्थापन, कार्बन संवर्धन, प्राकृतिक संसाधन संरक्षण और जलवायु-स्मार्ट कृषि को नई दिशा देगी। साथ ही किसानों को कम लागत में अधिक टिकाऊ और पर्यावरण-अनुकूल खेती अपनाने के लिए प्रेरित करेगी। राज्यभर में अनुसंधान और प्रसार गतिविधियों के समयबद्ध क्रियान्वयन के साथ इस महत्वाकांक्षी योजना को अंतिम रूप दे दिया गया है।

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