कोलकाता, 29 अप्रैल (सौरभ हलदार) पश्चिम बंगाल की राजनीति में बुधवार को उस वक्त उबाल चरम पर पहुंच गया, जब विधानसभा चुनाव के दूसरे और अंतिम चरण में 142 सीटों पर सुबह 7 बजे से मतदान शुरू हुआ। पूरे राज्य में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस और भाजपा के बीच सीधी टक्कर देखने को मिल रही है। दोनों दल अपनी-अपनी जीत के दावे कर रहे हैं, जबकि कांग्रेस और वाम दल भी मैदान में हैं, लेकिन मुकाबला मुख्य रूप से द्विध्रुवीय बन चुका है। इससे पहले 23 अप्रैल को हुए पहले चरण में 152 सीटों पर 93.17 प्रतिशत का रिकॉर्ड मतदान दर्ज किया गया था। दूसरे चरण में भी मतदाताओं का उत्साह कम नहीं दिखा और शाम 6 बजे तक 91.41 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया।

भारी मतदान को लेकर दोनों प्रमुख दल इसे अपने पक्ष में जनसमर्थन का संकेत बता रहे हैं।दक्षिण बंगाल की सीटों पर इस चरण में मतदान हुआ, जहां पिछले डेढ़ दशक से तृणमूल कांग्रेस का दबदबा कायम है। 2021 के चुनाव में भाजपा को उत्तर बंगाल में अच्छी सफलता मिली थी, लेकिन दक्षिण में वह अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर पाई थी। ऐसे में इस बार का मुकाबला और भी दिलचस्प हो गया है। इसी बीच राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री सुकांता मजूमदार ने दावा किया कि इस बार जनता ने परिवर्तन का मन बना लिया है और 170 से अधिक सीटों के साथ भाजपा सरकार बनाएगी।

उन्होंने कहा कि लोगों में सत्ता के खिलाफ जबरदस्त आक्रोश है। दूसरी ओर, तृणमूल कांग्रेस ने चुनाव प्रक्रिया पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पार्टी के वरिष्ठ नेता अभिषेक बनर्जी ने एक बुजुर्ग मतदाता की मौत को लेकर केंद्रीय बलों पर आरोप लगाया। उनका कहना है कि मतदान के दौरान कथित धक्का-मुक्की में बुजुर्ग की मौत हो गई, जिससे माहौल तनावपूर्ण हो गया। उन्होंने इसे लोकतंत्र पर हमला करार देते हुए कहा कि इस तरह की घटनाएं जनता को डराने की कोशिश है। भारी मतदान, तीखे आरोप और हिंसा के आरोपों के बीच अब सबकी नजर नतीजों पर टिकी है, जो यह तय करेंगे कि बंगाल की सत्ता किसके हाथ में जाएगी।

















