पटना, 26 अगस्त (अविनाश कुमार) राजधानी में छात्र आंदोलनों के बीच पहली कक्षा में पढ़ने वाला छह वर्षीय आदित्य कुमार अचानक चर्चा का केंद्र बन गया है। प्रदर्शनकारी छात्रों के बीच नजर आए आदित्य को पुलिस एक प्रदर्शन के दौरान अपने साथ थाने ले गई, जहां वह करीब पांच घंटे तक रहा। घटना के बाद बच्चे की तस्वीरें और उसके बयानों ने राजनीतिक और सामाजिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है।आदित्य पटना के पुनाईचक इलाके में अपने माता-पिता के साथ किराये के मकान में रहता है। उसके पिता मजदूरी करते हैं, जबकि मां दूसरे घरों में काम करती हैं। सीमित आर्थिक संसाधनों के बावजूद आदित्य पढ़ाई के साथ देश-दुनिया की घटनाओं में गहरी रुचि रखता है। बताया गया है कि वह अपने स्कूल बैग में भारतीय संविधान की प्रति रखता है और उसका दावा है कि वह संविधान के करीब 80 पन्ने पढ़ चुका है।

आदित्य पहली बार गर्दनीबाग स्थित प्रदर्शन स्थल पर नजर आया, जहां उसने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी के इस्तीफे की मांग की। 25 अगस्त को छात्रों के सीएम आवास घेराव कार्यक्रम के दौरान भी वह प्रदर्शनकारियों के साथ मौजूद था। इसी दौरान पुलिस उसे उठाकर थाने ले गई। उसके अनुसार, उसे दोपहर करीब दो बजे से शाम सात बजे तक थाने में रखा गया।आदित्य ने आरोप लगाया कि थाने में उसे धमकाया गया और उसके माता-पिता के साथ मारपीट की गई। उसने यह भी दावा किया कि उसे दोबारा किसी प्रदर्शन में शामिल नहीं होने के लिए दबाव दिया गया। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। आंदोलन में शामिल होने की वजह पूछे जाने पर आदित्य ने कहा कि जिस तरह परीक्षाओं में पेपर लीक हो रहे हैं, अगर व्यवस्था अभी ठीक नहीं हुई तो भविष्य में जब वह प्रतियोगी परीक्षा देगा, तब भी ऐसी समस्या सामने आ सकती है।

आदित्य के माता-पिता का कहना है कि प्रदर्शन में जाने का फैसला उसका अपना था। उनके मुताबिक, वह समाचारों पर नजर रखता है और देश-दुनिया की घटनाओं को समझने की कोशिश करता है।छह साल के बच्चे की आंदोलन में मौजूदगी ने अब यह सवाल खड़ा कर दिया है कि राजनीतिक और छात्र प्रदर्शनों में छोटे बच्चों की भागीदारी को लेकर प्रशासन और अभिभावकों की जिम्मेदारी क्या होनी चाहिए। घटना को लेकर पटना में चर्चा तेज है।













