पटना, 20 अगस्त (पटना डेस्क) भारत-नेपाल सीमा पर हाल के दिनों में बढ़ी भारत विरोधी गतिविधियों और सुरक्षा संबंधी चुनौतियों को देखते हुए बिहार सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। सीमा की चौकसी और निगरानी को अभेद्य बनाने के लिए बिहार के छह सीमावर्ती जिलों में 108 आधुनिक वॉच टावर बनाए जाएंगे। गृह विभाग ने इस महत्वाकांक्षी योजना को तत्काल प्रभाव से लागू करने के लिए संबंधित जिलाधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश जारी कर दिए हैं।गृह विभाग के अवर सचिव मनीष कुमार द्वारा पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, सीतामढ़ी, मधुबनी, सुपौल और अररिया के जिलाधिकारियों को भेजे गए पत्र में स्पष्ट कहा गया है कि भारत-नेपाल अंतरराष्ट्रीय सीमा पर निगरानी और परिचालन क्षमता को और अधिक मजबूत करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

इसके तहत रणनीतिक रूप से चिन्हित 108 स्थानों पर वॉच टावर स्थापित किए जाएंगे।विभाग ने प्रत्येक वॉच टावर के लिए 10 मीटर × 10 मीटर (100 वर्ग मीटर) भूमि उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। जिलाधिकारियों से कहा गया है कि भूमि अधिग्रहण और हस्तांतरण की प्रक्रिया को प्राथमिकता के आधार पर पूरा कर निर्माण कार्य शीघ्र शुरू कराया जाए, ताकि सीमा पर सुरक्षा व्यवस्था और प्रभावी बनाई जा सके।सूत्रों के अनुसार, हाल के दिनों में भारत-नेपाल सीमा और नो-मैन्स लैंड पर कई संदिग्ध गतिविधियां सामने आई हैं। कई स्थानों पर अतिक्रमण और स्थायी निर्माण की शिकायतें मिली हैं। वहीं सीमा के अनेक पिलर टूटे हुए या गायब पाए गए हैं, जिससे सीमा की स्पष्ट पहचान और निगरानी प्रभावित हो रही है।

सुरक्षा एजेंसियां नेपाल के आंतरिक हालात पर भी लगातार नजर बनाए हुए हैं। विशेषकर मधेश क्षेत्र में तनावपूर्ण परिस्थितियों के बाद सीमावर्ती इलाकों में लोगों के पलायन की आशंका जताई जा रही है। इसके अलावा तस्करी, अवैध आवाजाही और अन्य गैरकानूनी गतिविधियों को रोकने के लिए भी सीमा पर निगरानी बढ़ाने की आवश्यकता महसूस की गई है। सरकार का मानना है कि 108 वॉच टावरों के निर्माण से सीमा पर चौबीसों घंटे प्रभावी निगरानी संभव होगी। इससे सुरक्षा बलों की परिचालन क्षमता बढ़ेगी, संदिग्ध गतिविधियों पर त्वरित कार्रवाई हो सकेगी और भारत-नेपाल सीमा को अधिक सुरक्षित एवं सुदृढ़ बनाया जा सकेगा।













