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नीतीश के बाद कौन: बिहार में सत्ता संग्राम तेज, सम्राट चौधरी बने केंद्र, पुराने विवादों ने बढ़ाई सियासी गर्मी

पटना, 09 अप्रैल (अविनाश कुमार) बिहार की राजनीति इन दिनों उबाल पर है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के संभावित इस्तीफे की चर्चाओं ने सत्ता के गलियारों में हलचल तेज कर दी है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि राज्य की कमान अब किसके हाथों में जाएगी। इस बीच डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी का नाम सबसे आगे चल रहा है, लेकिन उनके नाम पर गठबंधन के भीतर ही मतभेद खुलकर सामने आ रहे हैं।सूत्रों के मुताबिक, एनडीए के भीतर मुख्यमंत्री पद को लेकर सहमति बनाने की कोशिश जारी है, लेकिन मामला इतना आसान नहीं दिख रहा।

जेडीयू चाहती है कि अगला मुख्यमंत्री भी नीतीश कुमार की तरह साफ-सुथरी छवि वाला हो। इसी मुद्दे को आधार बनाकर बीजेपी के भीतर भी कुछ नेता सम्राट चौधरी के नाम पर आपत्ति जता रहे हैं। जेडीयू नेताओं का साफ कहना है कि मुख्यमंत्री पूरे गठबंधन का चेहरा होता है, न कि किसी एक पार्टी का निर्णय।राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर सम्राट चौधरी को मुख्यमंत्री बनाया जाता है, तो उनकी तुलना सीधे नीतीश कुमार से होगी। ऐसे में उनके अतीत से जुड़े विवाद विपक्ष के लिए बड़ा हथियार बन सकते हैं। यही वजह है कि गठबंधन के कई नेता इस फैसले को लेकर सतर्क रुख अपनाए हुए हैं।

सम्राट चौधरी का राजनीतिक सफर जितना तेज रहा है, उतना ही विवादों से भी घिरा रहा है। 1999 में, जब उनके पिता शकुनी चौधरी आरजेडी में शामिल हुए, उसी दौरान 19 मई को उन्हें राबड़ी देवी की सरकार में मंत्री बना दिया गया। हैरानी की बात यह थी कि उस समय वे न तो विधानमंडल के सदस्य थे और न ही उनकी उम्र 25 वर्ष पूरी हुई थी। इस नियुक्ति को लेकर उस समय बड़ा विवाद खड़ा हुआ। समता पार्टी के नेताओं ने राज्यपाल और निर्वाचन अधिकारियों से शिकायत की। जांच में यह सामने आया कि सम्राट चौधरी अपनी उम्र से संबंधित दस्तावेजों को लेकर संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए। इसके बाद तत्कालीन राज्यपाल सूरजभान ने 16 नवंबर 1999 को अधिसूचना जारी कर उन्हें मंत्रिपरिषद से बर्खास्त कर दिया। राजभवन ने न सिर्फ उन्हें पद से हटाया, बल्कि राज्य सरकार को उनके खिलाफ धोखाधड़ी और गलत जानकारी देने का मामला दर्ज करने का भी निर्देश दिया। साथ ही मंत्री के रूप में मिले वेतन और भत्तों की वसूली के आदेश ने उस समय सियासी तूफान खड़ा कर दिया था। अब, जब बिहार में नेतृत्व परिवर्तन की आहट तेज हो रही है, सम्राट चौधरी का यही अतीत फिर से चर्चा में आ गया है। आने वाले दिनों में पार्टी आलाकमान का फैसला न सिर्फ बिहार की सत्ता का भविष्य तय करेगा, बल्कि राज्य की राजनीति की दिशा भी बदल सकता है।

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