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नज़र के पास नहीं

आज साहित्यिक आंगन गीत गुंजन में कश्मीर, ऊटी की सुप्रसिद्ध कवयित्री शम्मा भलेसी जी की एक ग़ज़ल

पता था कोई हमारा है गम-शनास नहीं।

किसी से हमने सो रक्खी कभी भी आस नहीं।

गुमां ये होता है लौटेगा इक ना इक दिन वो,

जो दिल के पास बहुत है, नज़र के पास नहीं।

कमी भी कोई नहीं पास ग़म की दौलत की,

बहुत अमीर है हम भी, हैं कम-असास नहीं।

उतर न जाये मेरे दिल से बेवफ़ा यारो,

बहुत दिनों से तबीयत मेरी उदास नहीं।

भला वो दर्द हमारे की क्या दवा करता,

कि अपने आपसे भी जो हो खुद -शनास नहीं।

~ शम्मा भलेसी

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