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दीपक प्रकाश बने बिहार विधान परिषद सदस्य: राज्यपाल की मंजूरी से टला मंत्री पद का संकट, मनोनयन पर छिड़ा सियासी घमासान

पटना, 06 अगस्त (अविनाश कुमार) बिहार की राजनीति में बुधवार को बड़ा घटनाक्रम सामने आया। राज्यपाल ने बिहार सरकार के मंत्री दीपक प्रकाश को बिहार विधान परिषद (एमएलसी) का सदस्य मनोनीत कर दिया। मंत्रिमंडल की ओर से भेजे गए प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के साथ ही उनके मंत्री पद पर मंडरा रहा संवैधानिक संकट फिलहाल टल गया है। हालांकि, इस मनोनयन के बाद राजनीतिक गलियारों में नया विवाद भी शुरू हो गया है। संविधान के अनुच्छेद-171 के तहत राज्यपाल को विधान परिषद के कुल सदस्यों के एक-छठे हिस्से को मनोनीत करने का अधिकार है। बिहार विधान परिषद में यह संख्या 12 है। संविधान के अनुसार, मनोनीत सदस्य साहित्य, विज्ञान, कला, सहकारिता आंदोलन अथवा समाज सेवा जैसे क्षेत्रों में विशेष ज्ञान या व्यावहारिक अनुभव रखने वाले होने चाहिए।

विपक्ष का आरोप है कि दीपक प्रकाश इन निर्धारित श्रेणियों में नहीं आते, इसलिए उनके मनोनयन पर संवैधानिक सवाल उठ रहे हैं।वरिष्ठ पत्रकार अरुण कुमार पांडेय का कहना है कि राज्यपाल ने दीपक प्रकाश को किस क्षेत्र के प्रतिनिधि के रूप में मनोनीत किया है, यह स्पष्ट होने के बाद विवाद और गहरा सकता है। कांग्रेस प्रवक्ता असित नाथ तिवारी ने तंज कसते हुए कहा कि “दीपक प्रकाश देश के बड़े साहित्यकार हैं, शायद इसी उपलब्धि के आधार पर उन्हें मनोनीत किया गया है।”वहीं, राष्ट्रीय जनता दल के प्रवक्ता चित्तरंजन गगन ने सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि जो दल परिवारवाद का विरोध करते रहे, वही अब “पिछले दरवाजे” से अपने परिजनों को राजनीति में ला रहे हैं।

उन्होंने भाजपा और सहयोगी दलों पर भी राजनीतिक लाभ के लिए संवैधानिक व्यवस्था का उपयोग करने का आरोप लगाया। दीपक प्रकाश को भाजपा एमएलसी देवेश कुमार के इस्तीफे से रिक्त हुई सीट पर मनोनीत किया गया है। उनका कार्यकाल मार्च 2027 तक रहेगा और वह जल्द ही विधान परिषद सदस्य के रूप में शपथ लेंगे।गौरतलब है कि दीपक प्रकाश पहली बार नवंबर 2025 में मंत्री बने थे और मई 2026 में दोबारा मंत्री पद की शपथ ली थी। उस समय वह किसी भी सदन के सदस्य नहीं थे, जिसे लेकर मामला न्यायालय तक पहुंचा था। अब राज्यपाल के मनोनयन के बाद मंत्री पद पर संकट भले टल गया हो, लेकिन इस फैसले ने बिहार की राजनीति में नए संवैधानिक और राजनीतिक विमर्श को जन्म दे दिया है।

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