बक्सर, 01 सितंबर (विक्रांत) जिले के डुमरांव प्रखंड के कसिया गांव की रहने वाली कुसुम देवी ने संघर्ष और मेहनत के दम पर अपनी जिंदगी की तस्वीर बदल दी है। कभी दूसरे के घर में रहने को मजबूर कुसुम आज खुद की किराना दुकान चला रही हैं। जीविका से जुड़कर मिली वित्तीय सहायता को उन्होंने रोजगार का जरिया बनाया और परिवार को आर्थिक मजबूती की राह पर आगे बढ़ाया। उनकी यह सफलता ग्रामीण महिलाओं के आत्मनिर्भर बनने की प्रेरणादायक कहानी बन गई है। कुसुम देवी का परिवार लंबे समय तक आर्थिक तंगी से जूझता रहा। पति-पत्नी दोनों की दिहाड़ी मजदूरी ही परिवार की आय का मुख्य सहारा थी। मजदूरी का काम कभी मिलता तो कभी नहीं मिलता, जिससे आमदनी भी निश्चित नहीं थी। परिवार में पति-पत्नी के अलावा एक पुत्र और एक पुत्री हैं।

अपना मकान नहीं होने के कारण परिवार को दूसरे के घर में रहकर गुजारा करना पड़ता था। सीमित आमदनी के कारण बच्चों की पढ़ाई, स्वास्थ्य और भविष्य की जरूरतें पूरी करना भी बड़ी चुनौती थी।मुश्किल हालात के बीच कुसुम देवी जीविका से जुड़ीं और दुर्गा स्वयं सहायता समूह की सदस्य बनीं। स्वयं सहायता समूह से जुड़ने के बाद उन्हें नियमित बचत, वित्तीय अनुशासन और आजीविका के अवसरों की जानकारी मिली। समूह की सामूहिक ताकत ने उनमें आत्मविश्वास पैदा किया और उन्होंने परिवार की आर्थिक स्थिति बदलने के लिए खुद कुछ करने का फैसला लिया।इसी दौरान उन्हें SJY योजना के तहत 20 हजार रुपये की वित्तीय सहायता मिली। कुसुम देवी ने इस राशि का इस्तेमाल घरेलू खर्च में करने के बजाय स्थायी आय का साधन खड़ा करने में किया। उन्होंने गांव में छोटी किराना दुकान शुरू कर दी। धीरे-धीरे दुकान चल निकली और परिवार की आमदनी का एक नया रास्ता तैयार हो गया।

आज कुसुम देवी आत्मविश्वास के साथ अपनी किराना दुकान संचालित कर रही हैं। व्यवसाय से उन्हें करीब चार हजार रुपये प्रतिमाह की आय हो रही है। दुकान ने न केवल परिवार को आर्थिक सहारा दिया, बल्कि कुसुम को परिवार के आर्थिक फैसलों में भी सक्रिय भागीदारी का अवसर दिया है। कुसुम देवी की कहानी बताती है कि सही मार्गदर्शन, वित्तीय सहयोग और दृढ़ इच्छाशक्ति मिले तो ग्रामीण महिलाएं भी विपरीत परिस्थितियों को अवसर में बदल सकती हैं। उनकी सफलता आसपास की महिलाओं के लिए आत्मनिर्भरता की नई मिसाल बन रही है।

















