पटना, 03 मई (पटना डेस्क) बिहार की राजनीति में बड़ा उलटफेर तय माना जा रहा है। बहुप्रतीक्षित मंत्रिमंडल विस्तार अब अंतिम चरण में पहुंच गया है और सिर्फ औपचारिक घोषणा बाकी रह गई है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने नई दिल्ली में शीर्ष केंद्रीय नेतृत्व से मुलाकात कर प्रस्तावित सूची पर सहमति हासिल कर ली है। सूत्रों के मुताबिक, पश्चिम बंगाल समेत पांच राज्यों के चुनावी नतीजों के एक-दो दिन बाद शपथ ग्रहण की तारीख तय की जाएगी। माना जा रहा है कि इस विस्तार में पुराने और अनुभवी चेहरों को बरकरार रखते हुए कुछ नए और युवा नेताओं को भी मौका दिया जाएगा।

हालांकि मंत्रियों की कुल संख्या का फॉर्मूला पहले जैसा ही रहेगा, लेकिन विभागों में सीमित फेरबदल देखने को मिल सकता है। इस कदम को राज्य की नई प्रशासनिक दिशा तय करने वाला माना जा रहा है। दिल्ली दौरे के दौरान मुख्यमंत्री ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह समेत कई दिग्गज नेताओं से मुलाकात की। इनमें रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव, केंद्रीय मंत्री ललन सिंह, जीतन राम मांझी और नित्यानंद राय शामिल रहे। इन बैठकों में बिहार के विकास एजेंडे, प्रशासनिक प्राथमिकताओं और भविष्य की रणनीति पर विस्तार से चर्चा हुई।

इससे पहले पटना में मुख्यमंत्री ने पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से भी लंबी बातचीत की थी, जिसमें सीटों और विभागों के बंटवारे को लेकर प्रारंभिक सहमति बन चुकी है। राज्य में अधिकतम 36 मंत्रियों का प्रावधान है। पुराने फार्मूले के तहत भाजपा और जदयू को 15-15 मंत्री पद मिल सकते हैं, जबकि सहयोगी दलों को भी सीमित हिस्सेदारी दी जाएगी। सूत्रों का कहना है कि शुरुआती चरण में भाजपा के 13 और जदयू के 12 मंत्री शपथ ले सकते हैं, जबकि कुछ पद रणनीतिक कारणों से खाली रखे जाएंगे। यह विस्तार केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि सरकार की प्राथमिकताओं और राजनीतिक संतुलन का संकेत होगा। अनुभवी चेहरों के साथ नए नेताओं की एंट्री से जहां स्थिरता और ऊर्जा का मिश्रण दिखेगा, वहीं महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की भी संभावना जताई जा रही है।













