पटना, 02 जुलाई (पटना डेस्क) डॉक्टर्स डे के अवसर पर भागलपुर के जवाहर लाल नेहरू चिकित्सा महाविद्यालय (जेएलएनएमसीएच) को बड़ी सौगात मिली है। नेशनल मेडिकल काउंसिल (एनएमसी) ने एमबीबीएस की 30 अतिरिक्त सीटों को मंजूरी देते हुए कॉलेज की कुल नामांकन क्षमता 120 से बढ़ाकर 150 कर दी है। एनएमसी के मेडिकल असेसमेंट एंड रेटिंग बोर्ड (MARB) ने ई-मेल के माध्यम से ‘लेटर ऑफ परमिशन’ जारी कर इसकी आधिकारिक सूचना दी। जुलाई 2026-27 के नए शैक्षणिक सत्र से यह व्यवस्था लागू हो जाएगी।पिछले पांच वर्षों से सीट वृद्धि का मामला लंबित था। कॉलेज प्रशासन के लगातार प्रयास और संसाधनों के विकास के बाद आखिरकार एनएमसी ने हरी झंडी दे दी। इस उपलब्धि का श्रेय प्राचार्य डॉ. संदीप लाल के नेतृत्व में किए गए सुनियोजित प्रयासों को दिया जा रहा है।

उन्होंने आधुनिक आधारभूत संरचना, स्किल लैब, स्मार्ट क्लासरूम, डिजिटल लाइब्रेरी, गूगल बोर्ड और शोध सुविधाओं का विस्तृत ब्यौरा एनएमसी को भेजा था, जिसके आधार पर यह स्वीकृति मिली। हालांकि सीट वृद्धि के साथ एनएमसी ने कुछ गंभीर कमियों की ओर भी ध्यान दिलाया है। परिषद ने स्पष्ट किया है कि 150 सीटों के लिए कॉलेज में 114 फैकल्टी की आवश्यकता है, जबकि वर्तमान में केवल 84 फैकल्टी पंजीकृत हैं। निरीक्षण के दौरान इनमें से भी सिर्फ 76 शिक्षक ही मौजूद मिले। एनाटॉमी, एनेस्थीसिया, बायोकैमिस्ट्री, डर्मेटोलॉजी, ईएनटी, नेत्र रोग, पीडियाट्रिक्स, पैथोलॉजी, फिजियोलॉजी और रेडियो-डायग्नोसिस जैसे महत्वपूर्ण विभागों में प्रोफेसरों की कमी भी दर्ज की गई है। एनएमसी ने अगले 90 दिनों के भीतर किसी भी समय औचक भौतिक सत्यापन करने की चेतावनी दी है।

इसे देखते हुए कॉलेज प्रशासन ने सभी तैयारियां तेज कर दी हैं। चिकित्सकों और कर्मचारियों की छुट्टियां तत्काल प्रभाव से रद्द कर दी गई हैं ताकि निरीक्षण के दौरान कोई कमी सामने न आए। राज्य सरकार ने भी इस मामले को गंभीरता से लेते हुए फैकल्टी की कमी तीन माह के भीतर दूर करने का भरोसा दिया है। छात्राओं के लिए नए हॉस्टल निर्माण का निर्देश भी संबंधित एजेंसी को जारी कर दिया गया है। अब नीट-यूजी के सफल अभ्यर्थी यूजीएमएसी पोर्टल पर पंजीकरण, चॉइस फिलिंग और सीट आवंटन प्रक्रिया के माध्यम से जेएलएनएमसीएच को प्राथमिकता देकर प्रवेश ले सकेंगे। 50 सीटों से शुरू हुआ इस मेडिकल कॉलेज का सफर अब 150 सीटों तक पहुंच गया है, जिसे संस्थान के इतिहास में एक ऐतिहासिक उपलब्धि और भागलपुर सहित पूरे बिहार के चिकित्सा शिक्षा क्षेत्र के लिए मील का पत्थर माना जा रहा है।















