नई दिल्ली, 04 मई (सेंट्रल डेस्क) बिहार की सियासत से जुड़ा बड़ा मामला अब देश की सबसे बड़ी अदालत तक पहुंच गया है। चर्चित सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव की सुरक्षा को लेकर दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने अहम टिप्पणी करते हुए पटना हाई कोर्ट को तत्काल सुनवाई का निर्देश दिया है। कोर्ट ने साफ कहा कि इस तरह के मामलों की सुनवाई आमतौर पर सीधे सुप्रीम कोर्ट में नहीं होती, लेकिन देरी को देखते हुए हस्तक्षेप जरूरी हो गया। याचिका में पप्पू यादव ने आरोप लगाया है कि उन्हें केवल कागजों पर Y कैटेगरी की सुरक्षा दी गई है, जो जमीनी स्तर पर प्रभावी नहीं है। उनके वकील ने कोर्ट को बताया कि मौजूदा सुरक्षा में महज दो सुरक्षाकर्मी शामिल हैं, जो किसी भी गंभीर खतरे से निपटने के लिए नाकाफी हैं।

उन्होंने जोर देकर कहा कि यह व्यवस्था उनकी जान की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं करती। सुनवाई के दौरान वकील ने यह भी खुलासा किया कि पप्पू यादव के परिवार पर पहले भी हमला हो चुका है। उनके भाई पर हुए हमले का हवाला देते हुए कहा गया कि खतरा केवल आशंका नहीं, बल्कि वास्तविक है। यही कारण है कि उन्होंने Z+ सुरक्षा की मांग को जरूरी बताया। मामले में नया मोड़ तब आया जब कुख्यात लॉरेंस बिश्नोई गैंग का नाम सामने आया। वकील ने दावा किया कि इस गैंग की ओर से उन्हें खुली धमकी मिल चुकी है, जिससे खतरे की गंभीरता और बढ़ जाती है। हालांकि, सुनवाई के दौरान जस्टिस बागची ने सवाल उठाया कि जब उनके पास निजी सुरक्षाकर्मी भी हैं, तो Y कैटेगरी सुरक्षा को अपर्याप्त क्यों माना जा रहा है।

इस पर वकील ने दोहराया कि मौजूदा सुरक्षा बेहद सीमित और अपर्याप्त है। मुख्य न्यायाधीश ने स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता ने 24 बार सुनवाई सूचीबद्ध करने की मांग की, लेकिन मामला लंबित रहा। इसी देरी को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने पटना हाई कोर्ट को निर्देश दिया कि वह इस याचिका पर जल्द सुनवाई कर उचित निर्णय ले। अब इस हाई-प्रोफाइल मामले की अगली दिशा पटना हाई कोर्ट के फैसले पर निर्भर करेगी, जिस पर पूरे राज्य की नजरें टिकी हैं।













