बेतिया, 06 अगस्त (विनय कुमार गुप्ता) भूमि परिमार्जन की प्रक्रिया अब रैयतों के लिए बड़ी मुसीबत बनती जा रही है। गलत मौजा, खाता-खेसरा, रकबा और दाखिल-खारिज में हुई त्रुटियों के कारण सैकड़ों भूमि संबंधी मामले महीनों से लंबित पड़े हैं। नतीजतन अपनी पुश्तैनी जमीन पर अधिकार दर्ज कराने के लिए लोग लगातार राजस्व कार्यालयों और पंचायत स्तर पर आयोजित सहयोग शिविरों के चक्कर लगाने को मजबूर हैं, लेकिन समाधान की राह अब भी दूर नजर आ रही है। प्रखंड की विभिन्न पंचायतों में आयोजित सहयोग शिविरों में सबसे अधिक शिकायतें भूमि परिमार्जन, दाखिल-खारिज, अतिक्रमण और मौजा संबंधी गड़बड़ियों की सामने आ रही है।

किसानों का आरोप है कि राजस्व कर्मियों की लापरवाही से रिकॉर्ड में गलत मौजा दर्ज कर दिया गया, खाता-खेसरा और रकबा में त्रुटियां कर दी गईं। सही दस्तावेज होने के बावजूद दाखिल-खारिज नहीं किया जा रहा है, जिससे लोग अपनी ही जमीन के अधिकार से वंचित हो रहे हैं।ग्रामीणों का कहना है कि सहयोग शिविरों में आवेदन लेने के बाद भी मामलों का समय पर निष्पादन नहीं हो रहा है। हाल ही में उत्तर तेल्हुआ पंचायत में आयोजित सहयोग शिविर के दौरान कई किसानों ने अंचलाधिकारी से जवाब-तलब किया। शिकायतों के अंबार और समाधान में हो रही देरी के कारण शिविर का माहौल भी तनावपूर्ण हो गया।दक्षिण तेल्हुआ के रैयत विभूति नारायण राय ने बताया कि उनकी जमीन दक्षिण तेल्हुआ मौजा में है, लेकिन रिकॉर्ड में उसे उत्तर तेल्हुआ में दर्ज कर दिया गया।

ऑनलाइन परिमार्जन आवेदन और सहयोग शिविर के पोर्टल पर शिकायत देने के बावजूद अब तक सुधार नहीं हुआ।वहीं, बैकुंठवा पंचायत के मुखिया अफरोज नैयर का आरोप है कि अभिलेखीय त्रुटियों के कारण उनकी जमीन से अतिक्रमण नहीं हटाया जा रहा, जबकि भूमि सुधार उप समाहर्ता (डीसीएलआर) इस संबंध में आदेश जारी कर चुके हैं। एक अन्य रैयत ने बताया कि डीसीएलआर न्यायालय के आदेश के बावजूद पिछले दस माह से उनकी जमीन का दाखिल-खारिज लंबित है। जिले के प्रभारी सचिव के निर्देश के बाद भी कार्रवाई नहीं हुई।इधर, अंचल प्रशासन का कहना है कि सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुरूप कार्य किया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार, पूर्व में कुछ राजस्व कर्मियों द्वारा हुई त्रुटियों को चरणबद्ध तरीके से सुधारा जा रहा है और लंबित मामलों के निष्पादन की प्रक्रिया जारी है।














