नालंदा, 14 सितम्बर (अविनाश पांडेय) आमतौर पर चाय की दुकानों पर लोग चुस्की लेकर आगे बढ़ जाते हैं, लेकिन राजगीर बस स्टैंड स्थित श्रवण चाय दुकान की पहचान कुछ अलग है। यहां चाय के साथ इंसानियत, करुणा और ममता की ऐसी मिसाल देखने को मिलती है, जो पिछले करीब 35 वर्षों से अनवरत जारी है। दुकान पर आने वाले जरूरतमंद परिवारों के नवजात बच्चों को मुफ्त दूध दिया जाता है। यह सेवा आज भी बिना किसी प्रचार के जारी है। इस अनूठी पहल की शुरुआत वर्ष 1990 में श्रवण कुमार ने की थी। बस स्टैंड पर आने वाली कई ऐसी माताओं को देखकर उन्होंने यह फैसला लिया, जो आर्थिक मजबूरी के कारण अपने छोटे बच्चों के लिए दूध खरीद पाने में सक्षम नहीं थीं। उन्होंने तय किया कि उनकी दुकान पर कोई जरूरतमंद मां अपने बच्चे के लिए दूध मांगने आएगी तो उससे पैसे नहीं लिए जाएंगे।

समय बीतता गया और श्रवण कुमार का निधन हो गया, लेकिन उनके द्वारा शुरू की गई सेवा बंद नहीं हुई। उनके भाई रंजीत कुमार उर्फ टुन्ना बाबा ने भाई की इस परंपरा को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया। आज जन्म से 18 माह तक के बच्चों को यहां मुफ्त दूध उपलब्ध कराया जाता है।टुन्ना बाबा के अनुसार प्रतिदिन करीब तीन से चार लीटर दूध जरूरतमंद बच्चों में बांटा जाता है। जिन्हें इस सेवा की जानकारी है, वे स्वयं दुकान पर पहुंचते हैं। कई बार जरूरतमंद परिवारों को देखते ही टुन्ना बाबा खुद उन्हें बच्चे के लिए दूध लेने के लिए कहते हैं। उनका कहना है कि भाई की शुरू की गई सेवा को जारी रखना ही उनके लिए सबसे बड़ी संतुष्टि है। पुरुषोत्तम मास के दौरान राजगीर में लगने वाले मेले में इस सेवा का दायरा और बढ़ जाता है। अलग स्टॉल लगाकर प्रतिदिन करीब दस लीटर दूध जरूरतमंद बच्चों को दिया जाता है।

यहां नालंदा ही नहीं, बल्कि देश के विभिन्न राज्यों और पड़ोसी नेपाल से आने वाले परिवार भी इस सेवा का लाभ उठा चुके हैं।टुन्ना बाबा दूध लेने वाली माताओं से कहते हैं- “पहले इस नन्हे दोस्त को दूध पिलाइए, पैसे किसी जरूरी चीज के लिए रखिए।” उनकी यह छोटी-सी पहल आज हजारों लोगों के लिए मानवता की बड़ी मिसाल बन चुकी है। राजगीर की यह चाय दुकान साबित कर रही है कि सेवा के लिए बड़े संसाधन नहीं, बल्कि बड़ा दिल चाहिए।
















