गोरखपुर, 22 अप्रैल (अंकित यादव) गोरखपुर में पेट्रोल-डीजल को लेकर हालात अचानक बिगड़ गए हैं। मांग में तेज उछाल के कारण मंगलवार को आपूर्ति व्यवस्था लड़खड़ा गई और शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक कई पेट्रोल पंप सूखने लगे। हालात ऐसे बन गए कि महानगर के कई पंपों पर भी तेल खत्म हो गया, जिससे लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। हालांकि प्रशासन ने तुरंत हरकत में आते हुए बैतालपुर डिपो से अतिरिक्त तेल मंगवाकर शाम तक शहर के अधिकांश पंपों पर आपूर्ति सामान्य कर दी, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में संकट अब भी बरकरार है।

बताया जा रहा है कि जिले के एक तिहाई से अधिक पंपों पर तेल खत्म हो चुका है। जिला पूर्ति अधिकारी रामेंद्र प्रताप सिंह ने दावा किया कि महानगर में स्थिति नियंत्रण में है और लगातार टैंकर भेजे जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि तेल की कोई वास्तविक कमी नहीं है, बल्कि अचानक बढ़ी मांग के कारण अस्थायी समस्या उत्पन्न हुई है। दरअसल, सीमावर्ती जिलों से भारी संख्या में लोग गोरखपुर पहुंचकर तेल भरवा रहे हैं। महराजगंज, देवरिया, मऊ और संतकबीरनगर से लोग बड़ी संख्या में यहां आ रहे हैं, जिससे पंपों पर दबाव अचानक कई गुना बढ़ गया है।

वहीं, कुछ लोग गैलन में तेल भरकर स्टॉक करने में भी जुट गए हैं, जिससे स्थिति और बिगड़ रही है। तेल की किल्लत के बीच पंप मालिकों ने भी नई व्यवस्था लागू कर दी है। अब कई पंपों पर एक बार में केवल 2 से 4 लीटर पेट्रोल ही दिया जा रहा है, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों को राहत मिल सके। डीजल के लिए भी यही नियम लागू किया गया है, हालांकि वाहनों में जरूरत के अनुसार डीजल दिया जा रहा है।सूत्रों की मानें तो पंप संचालकों को मौखिक रूप से कम तेल बेचने के निर्देश भी दिए गए हैं।

इसके तहत पंप देर से खोलने, जल्दी बंद करने और बीच-बीच में ‘तेल खत्म’ का बोर्ड लगाने की बात कही गई है।कुल मिलाकर, बढ़ती मांग और बाहरी दबाव ने गोरखपुर में ईंधन संकट को गहरा दिया है, जिससे आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित हो रही है।













