पटना, 20 अगस्त (अविनाश कुमार) बिहार में दूसरी राजधानी को लेकर एक बार फिर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने राज्य सरकार से गया को बिहार की दूसरी राजधानी घोषित करने की मांग उठाते हुए कहा है कि झारखंड गठन के बाद बदले हालात में अब गया इस जिम्मेदारी के लिए सबसे उपयुक्त शहर है। नेताओं का दावा है कि इससे मगध क्षेत्र के विकास को नई गति मिलेगी और पूरे दक्षिण बिहार को व्यापक लाभ होगा।मांग करने वालों में बिहार प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रदेश प्रतिनिधि विजय कुमार मिट्ठू, पूर्व विधायक मो. खान अली, जिला कांग्रेस उपाध्यक्ष बाबूलाल प्रसाद सिंह, राम प्रमोद सिंह, दामोदर गोस्वामी, टिंकू गिरी, शिव कुमार चौरसिया, रूपेश चौधरी, अशोक राम, मुन्ना मांझी सहित कई कांग्रेस नेता शामिल हैं।

नेताओं ने कहा कि बिहार और झारखंड के विभाजन के बाद पूर्व के एकीकृत बिहार की दूसरी राजधानी रांची झारखंड में चली गई। ऐसे में प्रशासनिक संतुलन और क्षेत्रीय विकास को ध्यान में रखते हुए गया को बिहार की दूसरी राजधानी बनाया जाना चाहिए। उनका कहना है कि गया में दूसरी राजधानी बनने की सभी आवश्यक योग्यताएं मौजूद हैं।कांग्रेस नेताओं के अनुसार, यदि गया को दूसरी राजधानी का दर्जा मिलता है तो यहां पटना उच्च न्यायालय की स्थायी पीठ स्थापित करने का रास्ता आसान होगा। साथ ही अनुग्रह नारायण मगध मेडिकल कॉलेज का विकास एम्स के स्तर पर किया जा सकेगा। इसके अलावा गया को देश के प्रमुख स्मार्ट शहरों में शामिल करने, आधारभूत ढांचे के विस्तार, रोजगार सृजन और निवेश को बढ़ावा मिलने की भी संभावना है।

नेताओं ने कहा कि गया केवल ऐतिहासिक शहर ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध धार्मिक एवं पर्यटन केंद्र भी है। भगवान बुद्ध की ज्ञानस्थली और हिंदू धर्म में मोक्ष की नगरी के रूप में इसकी विशेष पहचान है। हर वर्ष देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु और पर्यटक यहां पहुंचते हैं। उनका मानना है कि दूसरी राजधानी बनने से प्रशासनिक सुविधाएं बढ़ेंगी, पर्यटन को नई उड़ान मिलेगी और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी। कांग्रेस नेताओं ने राज्य सरकार से इस मांग पर गंभीरता से विचार करते हुए गया के समग्र विकास के लिए आवश्यक कदम उठाने की अपील की है।














