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उड़ता बिहार बनने की राह पर राज्य: प्रशांत किशोर का शराबबंदी पर बड़ा हमला, कानून-व्यवस्था और गिरिराज सिंह पर भी साधा निशाना

पटना, 16 अगस्त (अविनाश कुमार) जन सुराज पार्टी के संस्थापक और बांकीपुर विधायक प्रशांत किशोर ने अपने विधानसभा क्षेत्र के दौरे के दौरान बिहार सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने दावा किया कि राज्य में लागू शराबबंदी कानून पूरी तरह विफल हो चुका है और इसकी वजह से बिहार अब ‘उड़ता पंजाब’ की तर्ज पर ‘उड़ता बिहार’ बनने की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि यदि मौजूदा स्थिति नहीं बदली तो आने वाले समय में समाज को गंभीर परिणाम भुगतने पड़ेंगे।प्रशांत किशोर ने कहा कि बांकीपुर के लगभग हर वार्ड से लोग सूखे नशे की बढ़ती समस्या की शिकायत कर रहे हैं। उनके अनुसार, वह पिछले तीन वर्षों से लगातार कहते आ रहे हैं कि शराबबंदी कानून केवल कागजों तक सीमित रह गया है।

उन्होंने आरोप लगाया कि भ्रष्ट पुलिस अधिकारियों और शराब माफिया की कथित मिलीभगत के कारण नशे का कारोबार घर-घर तक पहुंच चुका है। उनका कहना था कि दो वर्ष पहले उन्होंने ‘उड़ता बिहार’ की आशंका जताई थी और अब हालात उसी दिशा में बढ़ते दिखाई दे रहे हैं।राज्य की कानून-व्यवस्था पर भी उन्होंने सरकार को घेरते हुए कहा कि जब तक सत्ता का चरित्र अपराधमुक्त नहीं होगा, तब तक अपराध पर प्रभावी नियंत्रण संभव नहीं है। उन्होंने दावा किया कि बिहार में अपराध, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार और पलायन जैसी समस्याएं इसलिए बनी हुई हैं क्योंकि जनता ने मुद्दों के बजाय जाति, धर्म और राजनीतिक समीकरणों के आधार पर मतदान किया है। केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह के हालिया बयानों पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रशांत किशोर ने कहा कि उन्हें अनावश्यक बयानबाजी से बचना चाहिए।

उन्होंने आरोप लगाया कि बेगूसराय की राजनीति को ध्यान में रखकर जातीय समीकरण साधने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि बयानबाजी जारी रही तो वे कई राजनीतिक तथ्यों को सार्वजनिक करेंगे।प्रशांत किशोर ने आरोप लगाया कि केंद्रीय मंत्री रहते हुए गिरिराज सिंह बिहार में उद्योग स्थापित कराने में सफल नहीं रहे और रोजगार सृजन के बजाय केवल राजनीतिक मुद्दों को हवा देते रहे। उन्होंने कहा कि राज्य के कई संवेदनशील मामलों पर भी अपेक्षित प्रतिक्रिया नहीं दी गई। अंत में उन्होंने टिप्पणी की कि अब राज्य और देश की राजनीति में नए नेतृत्व को आगे आने का समय है। प्रशांत किशोर के इन बयानों के बाद बिहार की राजनीति में एक बार फिर शराबबंदी, कानून-व्यवस्था और राजनीतिक जवाबदेही को लेकर बहस तेज होने की संभावना है।

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