नई दिल्ली, 09 अप्रैल (अशोक “अश्क”) अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनावपूर्ण हालात के बीच आखिरकार सीजफायर पर सहमति बन गई है, जिसे लेकर भारत ने सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है। भारत सरकार ने बुधवार को इस अहम घटनाक्रम का स्वागत करते हुए कहा कि पश्चिम एशिया में स्थायी शांति के लिए बातचीत और कूटनीति ही सबसे कारगर रास्ता है। विदेश मंत्रालय की ओर से जारी बयान में कहा गया कि लंबे समय से चल रहे इस संघर्ष ने आम लोगों को भारी नुकसान पहुंचाया है।

इसके साथ ही वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति भी प्रभावित हुई है, जिससे कई देशों की अर्थव्यवस्था पर असर पड़ा है। भारत ने उम्मीद जताई है कि इस सीजफायर के बाद ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ के जरिए होने वाला अंतरराष्ट्रीय व्यापार फिर से सुचारु रूप से शुरू हो सकेगा। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि भारत हमेशा से तनाव कम करने, संवाद को बढ़ावा देने और कूटनीतिक समाधान पर जोर देता रहा है। बयान में कहा गया कि यह सीजफायर पश्चिम एशिया में स्थायी शांति की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।

गौरतलब है कि अमेरिका और ईरान के बीच दो सप्ताह के लिए सीजफायर पर सहमति बनी है। यह समझौता ईरान पर हुए हवाई हमलों के 39 दिन बाद संभव हो पाया है। इससे पहले अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर कहा था कि यदि ईरान ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ को सुरक्षित तरीके से खोलने पर सहमत होता है, तो अमेरिका दो हफ्तों के लिए हमले रोक सकता है।ईरान के विदेश मंत्री अब्बास आरागची ने भी इस पर सहमति जताते हुए कहा कि यदि हमले बंद होते हैं तो ईरान भी अपनी जवाबी कार्रवाई रोक देगा। इससे क्षेत्र में शांति बहाली की उम्मीदें और मजबूत हुई हैं।

















