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पीछे हटने का सवाल ही नहीं, जब हरबख्श सिंह के फैसले ने पाकिस्तानी पैटन टैंकों को बना दिया कब्रिस्तान

बक्सर, 11 सितम्बर (विक्रांत) इतिहास कभी-कभी तस्वीरों के जरिए ऐसी कहानी कह जाता है, जिसे शब्दों में बयान करना मुश्किल होता है। सोशल मीडिया पर सामने आई एक पुरानी ब्लैक एंड व्हाइट तस्वीर भी 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध की यादें ताजा कर रही है। तस्वीर में तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के साथ भारतीय सेना के जांबाज अधिकारी लेफ्टिनेंट जनरल हरबख्श सिंह नजर आ रहे हैं। शास्त्री जी को तलवार भेंट किए जाने वाली यह तस्वीर उस दौर के राजनीतिक और सैन्य नेतृत्व के अद्भुत तालमेल की कहानी बयां करती है।1965 के युद्ध के दौरान हरबख्श सिंह भारतीय सेना की वेस्टर्न कमांड के प्रमुख थे। पाकिस्तान की सेना जब पंजाब की ओर बढ़ रही थी और उसके पैटन टैंक भारतीय क्षेत्र के लिए खतरा बन रहे थे, तब सेना की रणनीति को लेकर महत्वपूर्ण निर्णय सामने आया।

इसी दौरान हरबख्श सिंह ने पीछे हटने के बजाय मोर्चे पर डटे रहने का फैसला किया। उनका मानना था कि पीछे हटने से सैनिकों का मनोबल प्रभावित होगा और पंजाब के महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर खतरा बढ़ जाएगा।हरबख्श सिंह की रणनीति के तहत असल उत्तर क्षेत्र में ऐसा मोर्चा तैयार किया गया, जिसने पाकिस्तान के भारी-भरकम पैटन टैंकों की रफ्तार रोक दी। गन्ने के खेतों में पानी भरकर इलाके को दलदली बनाया गया। जैसे ही पाकिस्तानी टैंक आगे बढ़े, वे दलदल में फंसते चले गए और भारतीय सेना ने उन पर जोरदार प्रहार किया। इस युद्ध के बाद असल उत्तर का इलाका पाकिस्तानी पैटन टैंकों की तबाही के कारण लंबे समय तक चर्चा में रहा। इसी युद्ध में कंपनी क्वार्टरमास्टर हवलदार अब्दुल हमीद ने अदम्य साहस दिखाते हुए कई पाकिस्तानी टैंकों को निशाना बनाया। वीरगति के बाद उन्हें देश के सर्वोच्च सैन्य सम्मान परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया।

1965 के युद्ध के साथ देश खाद्यान्न संकट से भी जूझ रहा था। ऐसे चुनौतीपूर्ण समय में प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने देशवासियों को ‘जय जवान, जय किसान’ का संदेश दिया। युद्ध के बाद देश ने अपने सैनिकों और नेतृत्व का सम्मान किया। हरबख्श सिंह को उनके सैन्य योगदान के लिए पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया। शास्त्री और हरबख्श सिंह की यह तस्वीर आज भी उस दौर की याद दिलाती है, जब राजनीतिक दृढ़ता और सैन्य साहस ने मिलकर देश की सुरक्षा को मजबूती दी थी। तस्वीर इतिहास के उस अध्याय की गवाही देती है, जिसमें भारतीय जवानों ने अदम्य साहस के साथ दुश्मन का मुकाबला किया था।

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