मुजफ्फरपुर, 03 सितम्बर (संतोष गुप्ता) कांटी अंचल में कृषि विभाग के राजकीय बीज गुणन प्रक्षेत्र की करीब 44 डिसमिल सरकारी जमीन को निजी व्यक्ति के नाम दाखिल-खारिज करने के मामले में तत्कालीन अंचलाधिकारी रिषिका की मुश्किलें बढ़ गई हैं। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के निर्देश पर उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। अपर समाहर्ता, राजस्व कुमार प्रशांत को संचालन पदाधिकारी नामित किया गया है। उनके निर्देश पर डीसीएलआर पश्चिमी ने मामले की छह बिंदुओं पर जांच कर रिपोर्ट सौंप दी है।जांच रिपोर्ट में तत्कालीन सीओ की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। सरकारी भूमि को निजी व्यक्ति के नाम दाखिल-खारिज करने की प्रक्रिया में कई अनियमितताएं सामने आई हैं। मामले में एक महिला अंचल अमीन की भूमिका भी संदिग्ध बताई गई है।

अमीन ने जमीन की मापी कर निजी व्यक्ति के दखल-कब्जे की रिपोर्ट दी थी। इसी आधार पर सीओ ने दाखिल-खारिज की स्वीकृति दे दी। जबकि हल्का कर्मचारी और राजस्व अधिकारी की जांच रिपोर्ट इसके ठीक विपरीत थी। दोनों ने दाखिल-खारिज को स्वीकृति योग्य नहीं बताते हुए वाद खारिज करने की अनुशंसा की थी।इंटर परीक्षा ड्यूटी में थे अधिकारी, फिर भी बताया उपस्थितजांच में सीओ के आदेश में 11 फरवरी 2025 की सुनवाई के दौरान तत्कालीन अनुमंडल कृषि पदाधिकारी को उपस्थित बताया गया। जबकि जांच में अधिकारी ने स्पष्ट किया कि उस दिन उनकी ड्यूटी इंटर परीक्षा में लगी थी और वे सुनवाई में पहुंचे ही नहीं थे। इसे जांच रिपोर्ट में भ्रामक और गलत तथ्य बताया गया है।सीओ की रिपोर्ट में विक्रेता को जमाबंदीधारी का पोता बताया गया था, लेकिन हल्का कर्मचारी और राजस्व अधिकारी की रिपोर्ट में इसका कोई उल्लेख नहीं मिला।

पोर्टल पर भी वंशावली या पारिवारिक सूची उपलब्ध नहीं थी।अमीन की रिपोर्ट पर भी सवालराजस्व अधिकारी ने जमीन पर कृषि विभाग का कब्जा और गेहूं की फसल होने की जानकारी दी थी। इसके करीब एक माह बाद अमीन ने जमीन को परती और निजी व्यक्ति के कब्जे में बताया। डीसीएलआर पश्चिमी ने इसे भी संदिग्ध माना है। उनका कहना है कि फरवरी में मापी हुई थी, जबकि गेहूं की फसल अप्रैल में कटती है। ऐसे में जमीन खाली होने की रिपोर्ट सवालों के घेरे में है।डीसीएलआर पश्चिमी की जांच रिपोर्ट मिल गई है। उसका अवलोकन किया जा रहा है। रिपोर्ट आगे की कार्रवाई के लिए विभाग को भेजी जाएगी।

















