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34 साल बाद जमुई की विकास गाड़ी की कमान महिला IAS के हाथ, शिप्रा चौधरी की एंट्री से अफसरशाही में हलचल

पटना, 27 अगस्त (पटना डेस्क) जमुई जिले के विकास की कमान 34 साल बाद एक बार फिर महिला अधिकारी के हाथों में आने जा रही है। वर्ष 1992 में जमुई की पहली उप विकास आयुक्त के रूप में आईएएस अधिकारी मृदुला सिन्हा ने पद संभाला था। इसके बाद तीन दशक से अधिक समय तक इस महत्वपूर्ण पद पर किसी महिला अधिकारी की तैनाती नहीं हुई। अब 2023 बैच की आईएएस अधिकारी शिप्रा विजय कुमार चौधरी के डीडीसी पद पर शुक्रवार को पदभार ग्रहण करने के साथ यह लंबा अंतराल खत्म हो जाएगा। वे निवर्तमान डीडीसी सुभाष चंद्र मंडल से पदभार लेंगी।उप विकास आयुक्त कार्यालय में लगी अधिकारियों की सूची इस बदलाव की गवाह है। सूची में सबसे ऊपर मृदुला सिन्हा का नाम दर्ज है, जिन्होंने जुलाई 1992 से 16 नवंबर 1992 तक डीडीसी के रूप में जिम्मेदारी संभाली थी।

उनके बाद लगातार पुरुष अधिकारी इस पद पर तैनात होते रहे। वर्ष 1992 से 2025 तक डीडीसी के रूप में 28 अधिकारियों के नाम दर्ज हैं। इनमें 11 आईएएस और 15 बिहार प्रशासनिक सेवा के अधिकारी शामिल रहे। हालांकि मृदुला सिन्हा के बाद किसी महिला अधिकारी को इस पद की जिम्मेदारी नहीं मिली। ऐसे में शिप्रा चौधरी की नियुक्ति को प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। शिप्रा चौधरी के पदभार संभालने के बाद ग्रामीण विकास, मनरेगा, प्रधानमंत्री आवास योजना, पंचायत स्तरीय योजनाओं सहित विभिन्न विकास कार्यक्रमों की निगरानी और क्रियान्वयन में आईएएस नेतृत्व की भूमिका बढ़ेगी। नई अधिकारी की कार्यशैली को लेकर प्रशासनिक हलकों में अभी से चर्चा शुरू हो गई है।

जमुई में डीडीसी पद पर आईएएस अधिकारियों को कई बार जिम्मेदारी मिल चुकी है। उपलब्ध सूची के अनुसार वर्ष 1992 से 2005 के बीच 14 डीडीसी में 11 आईएएस अधिकारी रहे। इसके बाद दिसंबर 2004 के बाद लंबे अंतराल के पश्चात वर्ष 2020 में आरिफ अहसन आईएएस डीडीसी बने। उन्होंने 27 अगस्त 2020 से 4 मई 2022 तक पद संभाला। अब करीब सवा चार वर्ष बाद शिप्रा चौधरी के रूप में आईएएस अधिकारी की फिर वापसी हो रही है। उनकी नियुक्ति को राज्य सरकार की विकास योजनाओं पर जोर देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि नई डीडीसी की प्राथमिकताएं और कार्यशैली आने वाले दिनों में ही स्पष्ट होंगी।

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