बक्सर, 27 अगस्त (विक्रांत) पिता की तमन्ना थी कि बेटा पढ़-लिखकर सरकारी नौकरी हासिल करे, लेकिन कारोबारी परिवार में पले-बढ़े स्वयं प्रकाश ने नौकरी की तलाश में भटकने के बजाय खुद का कारोबार खड़ा करने का फैसला किया। प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP) के तहत मिली 10 लाख रुपये की वित्तीय सहायता ने उनके सपने को उड़ान दी। आज उनकी बेकरी इकाई न केवल आत्मनिर्भरता की मिसाल बनी है, बल्कि सात लोगों के लिए रोजगार का सहारा भी है। शहर के औद्योगिक क्षेत्र निवासी व्यवसायी विनोधर ओझा के पुत्र स्वयं प्रकाश ने पोस्ट ग्रेजुएट तक शिक्षा हासिल की है। पिता कारोबार करते थे, जिसे देखकर स्वयं प्रकाश की दिलचस्पी भी व्यवसाय में बढ़ती गई। पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने नौकरी तलाशने के बजाय बाजार में लगातार मांग वाले बेकरी कारोबार को चुना।

इसके लिए उन्होंने बन, ब्रेड, पिज्जा बेस, पावरोटी और पाव भाजी जैसे उत्पाद तैयार करने की बारीकियां सीखीं।मई 2023 में पीएमईजीपी के तहत 10 लाख रुपये की वित्तीय सहायता मिलने के बाद उन्होंने शेड का निर्माण कराया, मशीनरी खरीदी और कच्चा माल जुटाकर उत्पादन शुरू किया। कारोबार को मजबूत करने के लिए बाद में स्वयं प्रकाश ने करीब पांच लाख रुपये और निवेश किए। हालांकि शुरुआती सफर बेहद चुनौतीपूर्ण रहा। करीब दो से ढाई वर्षों तक मुनाफा नहीं हुआ। एक ओर बाजार तैयार करने की चुनौती थी तो दूसरी ओर बैंक ऋण की ईएमआई का दबाव। बावजूद इसके उन्होंने हिम्मत नहीं छोड़ी। लगातार मेहनत का नतीजा रहा कि अब उनका ऋण पूरी तरह चुकता हो चुका है और कारोबार मुनाफे में है।

उत्पादन बढ़ाने के लिए इकाई में रोटरी रैक ओवन, डो मशीन और स्पाइरल ब्रेड कटर जैसी आधुनिक मशीनें लगाई गई हैं। वर्तमान में प्रतिदिन करीब 300 पैकेट बर्गर और 200 पैकेट पिज्जा बेस तैयार किए जाते हैं। मांग के अनुसार पाव भाजी समेत अन्य बेकरी उत्पाद भी बनाए जाते हैं।‘पफ बेकरी’ नाम से बाजार में पहुंच रहे उत्पादों की मुख्य आपूर्ति फिलहाल होटल और रेस्टोरेंट को होती है। बिक्री का दायरा बक्सर जिला मुख्यालय तक है, लेकिन अब आसपास के क्षेत्रों से भी मांग आने लगी है। स्वयं प्रकाश का लक्ष्य शाहाबाद के साथ उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती जिलों तक कारोबार फैलाना है। ग्राहकों के भरोसे को प्राथमिकता देते हुए उन्होंने रिटर्न पॉलिसी भी रखी है। उनका कहना है कि कारोबार में गुणवत्ता और ग्राहक का विश्वास ही सबसे बड़ी पूंजी है। नौकरी के बजाय रोजगार देने का यह सफर युवाओं के लिए प्रेरणा बन गया है।













