पटना, 27 अगस्त (पटना डेस्क) नेपाल में अचानक आई बाढ़ के बाद खगड़िया जिला प्रशासन और बाढ़ नियंत्रण विभाग पूरी तरह अलर्ट मोड में आ गया है। गंडक नदी पर बने वाल्मीकिनगर बराज का डिस्चार्ज फिलहाल करीब डेढ़ लाख क्यूसेक रहने से विभाग ने राहत की सांस ली है, लेकिन गंगा और बूढ़ी गंडक के बढ़ते जलस्तर ने चिंता बढ़ा दी है। संभावित खतरे को देखते हुए बांध-तटबंधों की निगरानी और चौकसी लगातार बढ़ाई जा रही है। बुधवार की रात बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल-एक, खगड़िया के कार्यपालक अभियंता मनोज कुमार सहनी सहित सभी सहायक और कनीय अभियंता संवेदनशील बांध-तटबंधों पर कैंप करते रहे। विभागीय अधिकारियों का कैंप आगे भी जारी रहेगा। तटबंधों के संवेदनशील स्थलों पर रात में निगरानी के लिए पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था की गई है।

गंगा के चार और बूढ़ी गंडक के तीन संवेदनशील स्थलों पर जेनरेटर लगाए गए हैं। निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने के लिए गंगा तटबंध पर 57 और बूढ़ी गंडक तटबंध पर 25 बांध श्रमिकों को तैनात किया गया है। इनका काम तटबंधों पर लगातार नजर रखना और किसी भी तरह की गड़बड़ी की सूचना तत्काल विभाग तक पहुंचाना है, ताकि समय रहते कार्रवाई की जा सके। इधर, गंगा और बूढ़ी गंडक के जलस्तर में वृद्धि दर्ज की गई है। खारा धार जलद्वार के पास गंगा का जलस्तर बुधवार सुबह छह बजे 35.05 मीटर था, जो गुरुवार सुबह बढ़कर 35.14 मीटर हो गया। यानी 24 घंटे में नौ सेंटीमीटर की वृद्धि हुई। गंगा खतरे के निशान से एक मीटर सात सेंटीमीटर ऊपर बह रही है।

इसी तरह एनएच-31 ब्रिज, अघोरी स्थान के पास बूढ़ी गंडक का जलस्तर 37.02 मीटर से बढ़कर 37.07 मीटर पहुंच गया। 24 घंटे में पांच सेंटीमीटर की बढ़ोतरी हुई है और नदी खतरे के निशान से 47 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है।मुख्य अभियंता नवल किशोर भारती ने कहा कि घबराने की जरूरत नहीं है। विभाग पूरी तरह सतर्क है और वाल्मीकिनगर बराज का डिस्चार्ज करीब डेढ़ लाख क्यूसेक है। उन्होंने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और सजग रहने की अपील की है। नारायणी नदी क्षेत्र के साथ गंगा-बूढ़ी गंडक इलाके में भी लोगों को सावधानी बरतने की जरूरत बताई गई है।













