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पंचायत चुनाव आरक्षण पर पटना हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, मुखिया चुनाव में नहीं चलेगा सरकारी नौकरी वाला आरक्षण कानून

पटना, 25 अगस्त (अविनाश कुमार) बिहार में पंचायत चुनाव को लेकर पटना हाईकोर्ट ने सोमवार को अहम फैसला सुनाते हुए मुखिया पद के आरक्षण की व्यवस्था को लेकर स्थिति स्पष्ट कर दी। न्यायमूर्ति पार्थ सारथी की एकल पीठ ने कहा कि मुखिया के चुनाव में आरक्षण बिहार पंचायत राज अधिनियम की धारा 15(5) के तहत लागू होगा। सरकारी नौकरियों और सेवाओं में आरक्षण से संबंधित बिहार आरक्षण अधिनियम, 1991 को सीधे पंचायत चुनाव में लागू नहीं किया जा सकता। कोर्ट का यह फैसला सहरसा जिले की ग्राम पंचायत राज सहुरिया के मुखिया मो. ईसा की याचिका पर आया। हाईकोर्ट ने जाति जांच समिति के फैसले और राज्य निर्वाचन आयोग के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसके तहत 2021 में निर्वाचित मुखिया को पद से हटा दिया गया था।

इससे याचिकाकर्ता को बड़ी राहत मिली है। EBC सीट से जीते थे मो. ईसा मामला 2021 के पंचायत चुनाव का है। मो. ईसा अत्यंत पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित सीट से मुखिया निर्वाचित हुए थे। उनके खिलाफ शिकायत की गई थी कि वह शेख समुदाय से हैं, लेकिन कथित तौर पर खुद को तेली (मुस्लिम) बताते हुए EBC प्रमाणपत्र हासिल किया। इसके बाद जाति जांच समिति और राज्य निर्वाचन आयोग की कार्रवाई में उन्हें पद से हटा दिया गया था।हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि मुखिया पद के चुनाव में आरक्षण का वैधानिक आधार बिहार पंचायत राज अधिनियम की धारा 15(5) है। वहीं 1991 का आरक्षण कानून मुख्य रूप से सरकारी पदों और सेवाओं में आरक्षण से संबंधित है। कोर्ट ने दोनों व्यवस्थाओं को अलग-अलग बताते हुए कहा कि सेवा में लागू आरक्षण के प्रावधानों को पंचायत चुनाव पर लागू करना उचित नहीं है।

125 साल पुराना रिकॉर्ड भी बना अहम आधार कोर्ट ने यह भी माना कि याचिकाकर्ता को बिहार से बाहर रहने वाला व्यक्ति नहीं माना जा सकता। रिकॉर्ड के अनुसार उनके पूर्वज करीब 125 वर्ष पहले उत्तर प्रदेश के जौनपुर से बिहार आए थे और उनकी तीन-चार पीढ़ियां बिहार में रह चुकी हैं। अदालत ने यह भी पाया कि जाति जांच समिति ने उनका जाति प्रमाणपत्र रद्द नहीं किया था और न ही उन्हें तेली (मुस्लिम) के अलावा किसी अन्य जाति का घोषित किया था। इधर, बिहार में पंचायत चुनाव को लेकर अभी तारीख घोषित नहीं हुई है। परिसीमन की प्रक्रिया के कारण इस वर्ष चुनाव नहीं होने की संभावना है। पहले परिसीमन पूरा होगा, उसके बाद चुनाव की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। ऐसे में अगले वर्ष पंचायत चुनाव होने की संभावना जताई जा रही है। पिछली बार 2021 में सितंबर से दिसंबर के बीच पंचायत चुनाव कराए गए थे।

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