समस्तीपुर, 23 अगस्त (हर्षिता “अश्क”) पटना-पूर्णिया ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे के प्रस्तावित अलाइनमेंट को लेकर सरायरंजन में पिछले कई महीनों से चल रहे जन संघर्ष ने अब नया मोड़ ले लिया है। संभावित जन-धन की क्षति को लेकर ग्रामीणों की आपत्ति को जिला प्रशासन ने गंभीरता से लिया है। पटना-पूर्णिया एक्सप्रेसवे रूट सुधार जन संघर्ष समिति, सरायरंजन की ओर से सौंपे गए आपत्ति ज्ञापन पर जिलाधिकारी कार्यालय ने संज्ञान लेते हुए पथ निर्माण विभाग और भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) के संबंधित अधिकारियों को पत्र भेजा है। पत्र के माध्यम से वैकल्पिक मार्ग रेखन पर विचार करने का अनुरोध किया गया है। समिति के सदस्य एवं सामाजिक कार्यकर्ता रंजीत निर्गुणी ने 17 अगस्त को जिलाधिकारी से मुलाकात कर ग्रामीणों की ओर से विस्तृत आपत्ति ज्ञापन सौंपा था।

ज्ञापन सौंपने वालों में सुशील कुमार, उमेश झा, सुरेश महतो, विजय झा, किशोरी प्रसाद साह और पप्पू साह शामिल थे। समिति ने दावा किया कि वर्तमान प्रस्तावित रूट से सरायरंजन क्षेत्र में करीब 140 घर और दुकान पूरी तरह प्रभावित होकर ध्वस्त होने की आशंका है। इससे बड़ी संख्या में परिवारों के सामने विस्थापन का संकट खड़ा हो सकता है।समिति ने करीब 50 वर्ष पुराने केएसआर महाविद्यालय पर भी प्रस्तावित अलाइनमेंट के गंभीर प्रभाव की बात कही है। उसके अनुसार कॉलेज की इंटर बिल्डिंग पूरी तरह प्रभावित होगी, जबकि डिग्री बिल्डिंग का कुछ हिस्सा भी इसकी जद में आएगा। इतना ही नहीं, कॉलेज के करीब दो-तिहाई खेल मैदान के भी समाप्त होने की आशंका जताई गई है। इससे विद्यार्थियों की शैक्षणिक और खेल गतिविधियों पर प्रतिकूल असर पड़ने की चिंता जाहिर की गई है।

वैकल्पिक रूट पर जोर समिति ने एनएचएआई के दस्तावेजों में कथित विरोधाभासों का मुद्दा भी उठाया है। समिति के अनुसार, आठ मई 2025 को स्थानीय विधायक की पहल पर जिला एवं अंचल प्रशासन तथा एनएचएआई के कनीय पदाधिकारियों के साथ हुई वार्ता के बाद एक वैकल्पिक मार्ग का नक्शा तैयार किया गया था। दावा है कि इस मार्ग से केवल 15 से 20 घर प्रभावित होते और केएसआर महाविद्यालय पूरी तरह सुरक्षित रहता।समिति का आरोप है कि वैकल्पिक नक्शे को अब तक एनएचएआई को अग्रसारित नहीं किया गया है। समिति ने मांग की है कि न्यूनतम जन-धन क्षति वाले वैकल्पिक रूट को अंतिम रूप दिया जाए। साथ ही अंतिम निर्णय तक विवादित मार्ग पर भूमि अधिग्रहण, मापी और अन्य कार्रवाई तत्काल रोकने की मांग की गई है।













