समस्तीपुर, 12 अगस्त (हर्षिता “अश्क”) ताजपुर-बख्तियारपुर फोरलेन परियोजना के निर्माण में सुस्ती को लेकर बुधवार को जिलाधिकारी रोशन कुशवाहा ने कड़ा रुख अपनाया। डीएम ने परियोजना के विभिन्न कार्यस्थलों का गहन निरीक्षण कर निर्माण की अद्यतन स्थिति, भूमि अर्जन से जुड़े मामलों और लंबित कार्यों की समीक्षा की। करीब 90 प्रतिशत काम पूरा होने के बावजूद शेष कार्यों की धीमी गति पर उन्होंने नाराजगी जताई और अधिकारियों को आपसी समन्वय के साथ बाधाएं दूर कर निर्माण कार्य में तेजी लाने का सख्त निर्देश दिया। निरीक्षण के दौरान डीएम ने भूमि संबंधी लंबित मामलों का प्राथमिकता के आधार पर शीघ्र निष्पादन करने को कहा। उन्होंने अभियंताओं और संबंधित अधिकारियों से कहा कि विभागीय स्तर पर आने वाली समस्याओं का तत्काल समाधान कर कार्य की रफ्तार बढ़ाई जाए, ताकि निर्धारित समय सीमा में परियोजना को पूरा किया जा सके।

ताजपुर-बख्तियारपुर परियोजना गंगा नदी पर बनने वाले महत्वाकांक्षी चार लेन पुल और पहुंच पथ का हिस्सा है। करीब 3,923 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाली इस ग्रीनफील्ड परियोजना की कुल लंबाई लगभग 51 किलोमीटर है। इसमें करीब 5.5 किलोमीटर लंबा मुख्य गंगा पुल शामिल है। परियोजना पटना के बख्तियारपुर को समस्तीपुर के ताजपुर से सीधे जोड़ेगी और इसे पीपीपी मोड में विकसित किया जा रहा है। परियोजना के अलग-अलग हिस्सों को 2026 के अंत से जून 2027 तक चालू करने का लक्ष्य रखा गया है। समस्तीपुर की ओर चक लालशाही से ताजपुर खंड के बीच करीब 16.2 किलोमीटर सड़क का निर्माण पूरा हो चुका है। वहीं मुख्य पुल के पिलर, सुपरस्ट्रक्चर और बख्तियारपुर के समीप आरओबी का काम जारी है। फोरलेन पुल के शुरू होने से उत्तर और दक्षिण बिहार के बीच दूरी करीब 60 किलोमीटर तक कम होने की उम्मीद है।

इससे यात्रा में दो से तीन घंटे की बचत होगी तथा महात्मा गांधी सेतु और राजेंद्र सेतु पर यातायात का दबाव घटेगा। परियोजना से समस्तीपुर, मुजफ्फरपुर, दरभंगा, पटना और गया समेत कई जिलों की बड़ी आबादी को लाभ मिलने की संभावना है। निरीक्षण के बाद डीएम ने गंगा के कटाव प्रभावित क्षेत्रों का भी जायजा लिया। उन्होंने कटाव निरोधक कार्यों की प्रगति, तकनीकी स्थिति और नदी के जलस्तर की जानकारी ली। अधिकारियों को संवेदनशील स्थलों का नियमित तकनीकी आकलन करने और सुरक्षात्मक उपाय सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि प्रभावित क्षेत्रों में आम लोगों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और प्रशासन 24 घंटे अलर्ट मोड पर रहे।













