पटना 12 अगस्त (पटना डेस्क) नेपाल के सुनसरी जिले के देवानगंज गांवपालिका अंतर्गत कप्तानगंज में 26 जुलाई को भड़की सांप्रदायिक हिंसा की आग भले ही अब शांत होती दिख रही हो, लेकिन उसका असर भारत-नेपाल सीमा पर अब भी पूरी तरह दिखाई दे रहा है। घटना के 16वें दिन भी नरपतगंज प्रखंड के फुलकाहा थाना क्षेत्र से सटी अंतरराष्ट्रीय सीमा पर सुरक्षा व्यवस्था बेहद कड़ी बनी हुई है। सीमा पर एसएसबी के जवान चौबीसों घंटे मुस्तैदी से तैनात हैं और हर गतिविधि पर पैनी नजर रखे हुए हैं।सुरक्षा कारणों से सीमा पार आम नागरिकों की आवाजाही पर फिलहाल पूरी तरह रोक बरकरार है। इसका सीधा असर सीमावर्ती गांवों के लोगों के जनजीवन पर पड़ रहा है। रोजमर्रा की जरूरतों, छोटे कारोबार, कृषि कार्यों और दोनों देशों के बीच वर्षों से चले आ रहे सामाजिक एवं पारिवारिक संपर्क पर भी इसका व्यापक प्रभाव देखा जा रहा है।

सीमावर्ती बाजारों में पहले जैसी रौनक नहीं है और लोगों को आवागमन में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। गौरतलब है कि 26 जुलाई की रात नेपाल के कप्तानगंज में कांवर यात्रा के दौरान उपजा विवाद देखते ही देखते सांप्रदायिक हिंसा में बदल गया था। हालात पर काबू पाने के दौरान पुलिस कार्रवाई और हिंसा में चार लोगों की मौत हो गई थी। इसके बाद नेपाल के कई इलाकों में तनाव फैल गया, जिसके मद्देनजर भारत-नेपाल सीमा पर सुरक्षा व्यवस्था को अभूतपूर्व स्तर तक सख्त कर दिया गया।वर्तमान हालात को देखते हुए फुलकाहा, मानिकपुर, कोशिकापुर और पथराहा समेत सीमावर्ती क्षेत्रों में एसएसबी और स्थानीय पुलिस लगातार संयुक्त गश्त कर रही है।

सीमा पर बने सभी प्रमुख प्रवेश मार्गों और पगडंडियों पर सघन जांच अभियान चलाया जा रहा है, ताकि किसी भी संदिग्ध व्यक्ति या असामाजिक तत्व की आवाजाही को रोका जा सके। समय-समय पर पुलिस और एसएसबी द्वारा संयुक्त फ्लैग मार्च निकालकर ग्रामीणों से शांति, सतर्कता और अफवाहों से दूर रहने की अपील भी की जा रही है। फुलकाहा बीओपी प्रभारी एवं सहायक सेनानायक राणा कुमार ने बताया कि सीमा पर तैनात सभी जवान 24 घंटे हाई अलर्ट पर हैं। उन्होंने कहा कि स्थिति पूरी तरह सामान्य होने तक सुरक्षा व्यवस्था में किसी प्रकार की ढिलाई नहीं बरती जाएगी तथा उच्च अधिकारियों के निर्देशों का सख्ती से पालन करते हुए सीमा की लगातार निगरानी जारी रहेगी।













