पटना, 08 अगस्त (पटना डेस्क) बिहार में जल परिवहन को नई रफ्तार देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। राज्य की जीवनरेखा मानी जाने वाली गंगा नदी पर राष्ट्रीय जलमार्ग-1 (एनडब्ल्यू-1) के किनारे 16 नए सामुदायिक जेटी बनाने का रास्ता लगभग साफ हो गया है। इन जेटी के निर्माण से न केवल यात्रियों की आवाजाही आसान होगी, बल्कि किसानों, मछुआरों और व्यापारियों को भी कम लागत में माल ढुलाई की बेहतर सुविधा मिलेगी। इसके साथ ही गंडक नदी के राष्ट्रीय जलमार्ग-37 पर पश्चिम चंपारण में दो नए जेटी प्रस्तावित किए गए हैं।परिवहन विभाग के अनुसार, चिन्हित 17 स्थानों में से 16 के लिए संबंधित जिलों से इनलैंड वाटरवेज अथॉरिटी ऑफ इंडिया (IWAI) को अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) मिल चुका है।

सबसे अहम बात यह है कि 10 स्टील जेटी का निर्माण कार्य शुरू भी हो चुका है, जिससे परियोजना के तेजी से आगे बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं। पटना के कंगनघाट, ग्यासपुर पीपापुल और महाजी पीपापुल, सारण के हरिहरनाथ मंदिर और सोनपुर, समस्तीपुर के पत्थरघाट व धरनीपट्टी पश्चिम तथा बेगूसराय के सिमरिया घाट, अयोध्या घाट और चित्रोघाट सहित कई स्थानों पर नए जेटी बनाए जाएंगे। इन परियोजनाओं से नदी किनारे बसे क्षेत्रों को परिवहन और व्यापार का नया आधार मिलने की उम्मीद है। सरकार अब गंगा के साथ-साथ गंडक नदी को भी जल परिवहन नेटवर्क से जोड़ने की दिशा में काम कर रही है। हालांकि पश्चिम चंपारण में प्रस्तावित दो जेटी के लिए सरकारी भूमि उपलब्ध नहीं होने से एनओसी की प्रक्रिया लंबित है। भूमि संबंधी समस्या दूर होते ही इन परियोजनाओं को भी गति मिलने की संभावना है।

वर्तमान में बिहार के 11 जिलों में गंगा किनारे 21 सामुदायिक जेटी संचालित हैं। इनमें पटना, भागलपुर, भोजपुर, वैशाली, कटिहार, बक्सर, सारण, समस्तीपुर, बेगूसराय, मुंगेर और खगड़िया शामिल हैं। नए जेटी बनने से यह नेटवर्क और अधिक मजबूत होगा। परिवहन विभाग के सचिव राज कुमार ने कहा कि सामुदायिक जेटी स्थानीय लोगों, किसानों, मछुआरों, व्यापारियों और यात्रियों के लिए अत्यंत उपयोगी साबित हो रहे हैं। IWAI निर्माण और दो वर्षों तक सफल संचालन के बाद इन जेटी को बिहार इनलैंड वाटर ट्रांसपोर्ट को सौंपता है।विशेषज्ञों का मानना है कि जल परिवहन के विस्तार से सड़कों पर माल ढुलाई का दबाव घटेगा, परिवहन लागत कम होगी और नदी किनारे बसे इलाकों की अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी। यदि यह योजना पूरी तरह सफल रही, तो आने वाले वर्षों में बिहार जल परिवहन और नदी आधारित कारोबार का बड़ा केंद्र बनकर उभर सकता है।













