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17वें स्थापना दिवस पर बिहार कृषि विश्वविद्यालय का बड़ा ऐलान: राज्यपाल ने लॉन्च किए एआई चैटबॉट, ब्लू टी और नए कृषि उत्पाद

,बक्सर, 06 अगस्त (विक्रांत) बिहार कृषि विश्वविद्यालय (बीएयू), सबौर का 17वां स्थापना दिवस गुरुवार को भव्य एवं गरिमामय माहौल में मनाया गया। विश्वविद्यालय परिसर में पूरे दिन उत्सव जैसा वातावरण रहा। कर्पूरी सभागार में आयोजित मुख्य समारोह में बिहार के राज्यपाल सह कुलाधिपति लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सैयद अता हसनैन और कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा आभासी माध्यम से शामिल हुए, जबकि ग्रामीण विकास एवं सूचना-जनसंपर्क मंत्री श्रवण कुमार, भागलपुर सांसद अजय कुमार मंडल तथा कहलगांव विधायक शुभानंद मुकेश ने समारोह में प्रत्यक्ष रूप से भाग लिया।

कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन एवं विश्वविद्यालय के कुलगीत से हुआ। कुलपति डॉ. डी. आर. सिंह ने अतिथियों का स्वागत करते हुए विश्वविद्यालय की उपलब्धियों और भविष्य की योजनाओं पर प्रकाश डाला।अपने संबोधन में राज्यपाल सह कुलाधिपति ने विश्वविद्यालय परिवार को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि 100 वर्ष से अधिक पुराने इस संस्थान ने कृषि शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार के क्षेत्र में देशभर में अपनी अलग पहचान बनाई है। उन्होंने हाल ही में प्राप्त NAAC की ‘ए’ ग्रेड और जलवायु-अनुकूल फसल किस्मों के विकास को विश्वविद्यालय की बड़ी उपलब्धि बताया।

उन्होंने कहा कि स्थापना दिवस केवल जश्न का अवसर नहीं, बल्कि भविष्य की जिम्मेदारियों का संकल्प लेने का भी समय है। इस अवसर पर राज्यपाल ने विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों द्वारा विकसित अपराजिता के फूलों से बनी ब्लू टी, कटहल के बीजों का आटा, हनी स्पून तथा किसानों और विद्यार्थियों के लिए तैयार एआई आधारित चैटबॉट “एग्री-ग्रंथ” का भी लोकार्पण किया।कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि बिहार कृषि विश्वविद्यालय पिछले 16 वर्षों से कृषि अनुसंधान, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और किसानोन्मुखी तकनीकों के विकास में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक और नवाचार के जरिए किसानों की आय बढ़ाना सरकार की प्राथमिकता है तथा “समृद्ध किसान ही समृद्ध बिहार और विकसित भारत की सबसे मजबूत आधारशिला हैं।

“ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार ने विश्वविद्यालय की उपलब्धियों की सराहना करते हुए कहा कि कम समय में इस संस्थान ने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है। वहीं कुलपति डॉ. डी. आर. सिंह ने कहा कि विश्वविद्यालय की असली सफलता प्रयोगशालाओं से नहीं, बल्कि उन किसानों से मापी जाएगी जिनकी आय बढ़ी, जोखिम घटे और जिनके गांवों तक वैज्ञानिक तकनीक पहुंची।समारोह के दौरान युवा शोधार्थियों को चार मिनट रिसर्च प्रेजेंटेशन (4MRF) के लिए सम्मानित किया गया। उत्कृष्ट शोध प्रकाशन करने वाले प्राध्यापकों, श्रेष्ठ किसानों और नवाचारी स्टार्टअप्स को भी सम्मान प्रदान किया गया। कार्यक्रम का संचालन उमा भारती तथा धन्यवाद ज्ञापन डॉ. चंदा कुशवाहा ने किया। 1908 में स्थापित ऐतिहासिक कृषि महाविद्यालय से विकसित बिहार कृषि विश्वविद्यालय आज 8 घटक महाविद्यालय, 12 अनुसंधान केंद्र और 22 कृषि विज्ञान केंद्रों के माध्यम से शिक्षा, अनुसंधान और कृषि प्रसार के क्षेत्र में किसानों के लिए नई उम्मीद बनकर उभरा है।

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